औद्योगिक विकास क्या है?
भारत की औद्योगिक नीति स्वतंत्रता के समय के राज्य-नियंत्रित मॉडल से आज एक उदारीकृत, वैश्विक रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था तक विकसित हुई है। 1991 के सुधार व मेक इन इंडिया जैसी पहल इस यात्रा के मुख्य पड़ाव हैं, जो CG TET/CGPSC का टॉपिक है।
परिचय
भारत की औद्योगिक नीति स्वतंत्रता के समय राज्य-नियंत्रित मॉडल से आज एक उदारीकृत, वैश्विक रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था तक विकसित हुई है। यह लेख इस यात्रा का पता लगाता है व मुख्य आधुनिक पहलों को कवर करता है।
औद्योगिक नीति संकल्प
| नीति | वर्ष | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| औद्योगिक नीति संकल्प | 1948 | "मिश्रित अर्थव्यवस्था" की नींव रखी — सार्वजनिक व निजी दोनों क्षेत्रों की भूमिका |
| औद्योगिक नीति संकल्प | 1956 | इसे "भारत का आर्थिक संविधान" भी कहा जाता है; उद्योगों को तीन अनुसूचियों में वर्गीकृत किया (सार्वजनिक क्षेत्र, मिश्रित, निजी) |
| नई औद्योगिक नीति (उदारीकरण) | 1991 | एक बड़ा मोड़ — लाइसेंसिंग आवश्यकताओं ("लाइसेंस राज") को घटाया, भारत को विदेशी निवेश हेतु खोला |
LPG सुधार (1991)
- Liberalisation (उदारीकरण), Privatisation (निजीकरण), Globalisation (वैश्वीकरण) — भारत के 1991 आर्थिक सुधारों के तीन स्तंभ।
- एक गंभीर भुगतान संतुलन संकट से प्रेरित; प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव व वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में।
- मुख्य परिवर्तन: अधिकांश उद्योगों हेतु औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त की, आयात शुल्क घटाया, अधिक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की अनुमति दी।
सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र
- सार्वजनिक क्षेत्र: सरकार के स्वामित्व व प्रबंधन वाली उद्यम (जैसे BHEL, ONGC, कोल इंडिया) — इन्हें सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) कहा जाता है।
- निजी क्षेत्र: निजी व्यक्तियों/कंपनियों के स्वामित्व वाली उद्यम।
- MSME (सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम): रोजगार का एक प्रमुख स्रोत; निवेश व टर्नओवर मानदंडों के आधार पर परिभाषित।
मुख्य आधुनिक पहलें
| पहल | शुरुआत | उद्देश्य |
|---|---|---|
| मेक इन इंडिया | 2014 | भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में बढ़ावा देना |
| स्टार्टअप इंडिया | 2016 | उद्यमिता व स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना |
| आत्मनिर्भर भारत | 2020 | आत्मनिर्भरता, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना |
| उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं | 2020 से | लक्षित क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण बढ़ाने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन |
एक शिक्षक के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
भारत की औद्योगिक यात्रा को समझना — लाइसेंस-आधारित अर्थव्यवस्था से उदारीकृत अर्थव्यवस्था तक — व्यापक आर्थिक शक्तियों को समझाने में मदद करता है जो छात्रों के परिवारों व भविष्य को प्रभावित करने वाले रोजगार अवसरों को आकार देती हैं।
संक्षिप्त पुनरावलोकन
- औद्योगिक नीति संकल्प 1956: इसे "भारत का आर्थिक संविधान" कहा जाता है।
- 1991 सुधार (LPG): उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण — प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में।
- 1991 सुधारों ने अधिकांश औद्योगिक लाइसेंसिंग ("लाइसेंस राज") समाप्त की।
- सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों को PSU कहा जाता है (जैसे ONGC, BHEL, कोल इंडिया)।
- मेक इन इंडिया (2014), स्टार्टअप इंडिया (2016), आत्मनिर्भर भारत (2020) — मुख्य आधुनिक पहलें।