भारत की राजनैतिक व्यवस्था एवं मौलिक अधिकार क्या हैं?
भारत एक संसदीय, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां शक्ति विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका — तीन अंगों में बंटी है। इस प्रणाली के केंद्र में संविधान के भाग III के अंतर्गत हर नागरिक को दिए गए छह मौलिक अधिकार हैं।
परिचय
भारत में संसदीय, संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य प्रकार की सरकार है, जहां शक्ति तीन अंगों में विभाजित है। इस प्रणाली के केंद्र में मौलिक अधिकार हैं, जो संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को प्रदान किए गए हैं।
भारत की शासन प्रणाली
- संसदीय प्रणाली: कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) विधायिका (संसद) से चुनी जाती है व उसके प्रति उत्तरदायी होती है — यह ब्रिटेन से ली गई है।
- सरकार के तीन अंग: विधायिका (कानून बनाना — संसद), कार्यपालिका (कानून लागू करना — राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद), न्यायपालिका (कानूनों की व्याख्या करना — सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय)।
- तीनों अंगों के बीच शक्तियों का पृथक्करण व नियंत्रण-संतुलन।
- संघीय संरचना: संघ व राज्यों के बीच सातवीं अनुसूची में तीन सूचियों के माध्यम से शक्तियों का विभाजन — संघ सूची (केंद्र), राज्य सूची (राज्य), समवर्ती सूची (दोनों)।
छह मौलिक अधिकार (भाग III, अनुच्छेद 12-35)
| अधिकार | अनुच्छेद | मुख्य सामग्री |
|---|---|---|
| समानता का अधिकार | 14-18 | कानून के समक्ष समानता, भेदभाव न होना, समान अवसर, अस्पृश्यता व उपाधियों का उन्मूलन |
| स्वतंत्रता का अधिकार | 19-22 | भाषण, सभा, आवागमन, वृत्ति; दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण; जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता |
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | 23-24 | मानव तस्करी, बलात श्रम, खतरनाक कार्यों में बाल श्रम (14 वर्ष से कम) प्रतिबंधित |
| धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार | 25-28 | अंतःकरण की स्वतंत्रता व धर्म का अबाध रूप से पालन, आचरण, प्रचार |
| सांस्कृतिक व शैक्षणिक अधिकार | 29-30 | अल्पसंख्यकों की भाषा/संस्कृति संरक्षण व शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के अधिकार की रक्षा |
| संवैधानिक उपचारों का अधिकार | 32 | मौलिक अधिकारों को लागू करवाने हेतु सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार |
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को संविधान का "हृदय व आत्मा" कहा।
- मूलतः, संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) भी एक मौलिक अधिकार था; इसे 44वें संशोधन, 1978 द्वारा हटाया गया व अनुच्छेद 300A के तहत विधिक अधिकार बनाया गया।
- अनुच्छेद 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) की व्यापक व्याख्या न्यायालयों द्वारा की गई है, जिसमें स्वच्छ पर्यावरण, गोपनीयता, शिक्षा आदि का अधिकार शामिल है।
- अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार, 6-14 वर्ष) 86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
अनुच्छेद 32/226 के अंतर्गत रिट
सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) व उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) मौलिक अधिकारों को लागू करवाने हेतु पांच प्रकार की रिट जारी कर सकते हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा।
एक शिक्षक के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
मौलिक अधिकार, विशेषकर शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) व शोषण के विरुद्ध अधिकार (बाल श्रम पर प्रतिबंध), शिक्षक के दैनिक कार्य व छात्रों के प्रति विधिक दायित्वों को सीधे प्रभावित करते हैं।
संक्षिप्त पुनरावलोकन
- तीन अंग: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका — शक्तियों के पृथक्करण सहित।
- संघीय संरचना: संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची)।
- छह मौलिक अधिकार: समानता (14-18), स्वतंत्रता (19-22), शोषण के विरुद्ध (23-24), धर्म (25-28), सांस्कृतिक व शैक्षणिक (29-30), संवैधानिक उपचार (32)।
- अंबेडकर द्वारा अनुच्छेद 32 को संविधान का "हृदय व आत्मा" कहा गया।
- 44वें संशोधन, 1978 द्वारा संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटाया गया (अब अनुच्छेद 300A)।
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार (6-14 वर्ष), 86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।