भारतीय स्वतंत्रता का इतिहास (1857-1947) क्या है?
भारत का स्वतंत्रता संग्राम 1857 के विद्रोह से शुरू होकर 1947 की आज़ादी तक चला, जिसमें कई आंदोलन व नेता शामिल रहे। यह कालानुक्रमिक इतिहास CG TET/CGPSC सामान्य ज्ञान के सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिकों में से एक है।
परिचय
भारत का स्वतंत्रता संग्राम, 1857 के विद्रोह से 1947 की स्वतंत्रता तक, सबसे अधिक बार पूछे जाने वाले सामान्य ज्ञान विषयों में से एक है। यह लेख कालानुक्रमिक क्रम में प्रमुख मील के पत्थर, आंदोलन व नेताओं को कवर करता है।
1857 का विद्रोह
- मेरठ में 10 मई 1857 को शुरू हुआ; इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है।
- तात्कालिक कारण: नई एनफील्ड राइफल हेतु चर्बी लगे कारतूस (गाय/सुअर की चर्बी लगे होने की अफवाह)।
- प्रमुख नेता: मंगल पांडे (बैरकपुर), रानी लक्ष्मीबाई (झांसी), बहादुर शाह ज़फर (नाममात्र नेता), तात्या टोपे, नाना साहेब।
- परिणाम: ब्रिटिश द्वारा दबाया गया; भारत सरकार अधिनियम, 1858 का कारण बना — ईस्ट इंडिया कंपनी शासन का अंत, ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष नियंत्रण।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना
- 1885 में एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक) द्वारा स्थापित, डब्ल्यू.सी. बनर्जी प्रथम अध्यक्ष थे।
- शुरुआत में उदारवादी दृष्टिकोण (उदारवादी चरण: 1885-1905) — दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले।
बंगाल विभाजन व उग्रवादी चरण (1905 से)
- लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन (1905) ने स्वदेशी आंदोलन (ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार) को जन्म दिया।
- उग्रवादी नेता (लाल-बाल-पाल): लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल।
- बंगाल 1911 में पुनः एकीकृत हुआ।
गांधी युग
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | भारत में गांधी का प्रथम सत्याग्रह, नील किसानों के मुद्दे पर |
| असहयोग आंदोलन | 1920-22 | जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के बाद शुरू हुआ; चौरी-चौरा घटना के बाद वापस लिया गया |
| साइमन कमीशन | 1928 | पूर्णतः ब्रिटिश आयोग; "साइमन गो बैक" नारे के साथ बहिष्कृत |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930 | दांडी मार्च / नमक सत्याग्रह (12 मार्च-6 अप्रैल 1930) से शुरू हुआ |
| गोलमेज सम्मेलन | 1930-32 | लंदन में तीन सम्मेलन; गांधी-इरविन समझौते के बाद गांधी ने दूसरे में भाग लिया (1931) |
| भारत सरकार अधिनियम | 1935 | प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 | गांधी का "करो या मरो" का आह्वान; "अगस्त क्रांति" |
सुभाष चंद्र बोस व आजाद हिंद फौज
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सहायता से स्वतंत्रता हेतु लड़ने वाली भारतीय राष्ट्रीय सेना (आजाद हिंद फौज) की स्थापना की।
- "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का नारा दिया।
स्वतंत्रता की ओर
- कैबिनेट मिशन (1946): संघीय संरचना का प्रस्ताव रखा; संविधान सभा के गठन का कारण बना।
- माउंटबेटन योजना (जून 1947): भारत विभाजन का प्रस्ताव रखा।
- भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, जवाहरलाल नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री बने; लॉर्ड माउंटबेटन अंतिम वायसराय व स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल थे।
एक शिक्षक के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
स्वतंत्रता संग्राम का यह कालक्रम एक बार-बार पूछे जाने वाले सामान्य ज्ञान विषय के रूप में व स्कूली छात्रों को नागरिकशास्त्र/इतिहास पढ़ाने हेतु मूल सामग्री दोनों के रूप में आवश्यक है।
संक्षिप्त पुनरावलोकन
- 1857 का विद्रोह मेरठ में शुरू हुआ (10 मई 1857); ईस्ट इंडिया कंपनी शासन के अंत का कारण बना (GoI अधिनियम 1858)।
- INC की स्थापना 1885 में A.O. ह्यूम ने की। बंगाल विभाजन (1905) → स्वदेशी आंदोलन।
- चंपारण सत्याग्रह (1917): भारत में गांधी का प्रथम। असहयोग (1920-22): जलियांवाला बाग के बाद।
- सविनय अवज्ञा (1930): दांडी मार्च से शुरू हुआ। भारत छोड़ो (1942): "करो या मरो।"
- भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली; नेहरू — प्रथम PM, माउंटबेटन — अंतिम वायसराय।