बच्चे भाषा कैसे सीखते हैं?
एक बच्चा अक्सर कहता है 'मैं जाया' — जबकि उसने कभी 'गया' की जगह 'जाया' कहते किसी को नहीं सुना होगा। यह त्रुटि दिखाती है कि भाषा-सीखना केवल नकल नहीं। भाषा-अर्जन के चार सिद्धांत CG TET/CGPSC में नियमित पूछे जाते हैं।
परिचय
एक बच्चा अक्सर कहता है "मैं जाया" — जबकि उसने अपने आसपास किसी को कभी "गया" की जगह "जाया" कहते नहीं सुना होगा (सही रूप "गया" है)। यह त्रुटि दिखाती है कि बच्चा नियमित क्रिया-रूप के पैटर्न ("खाया", "आया") को अनियमित क्रिया "जाना" पर भी लागू कर रहा है — यानी वह केवल नकल नहीं कर रहा, बल्कि भाषा के नियम स्वयं गढ़ (निर्माण कर) रहा है। यह अवलोकन भाषा-अर्जन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक की नींव है।
यह लेख "बच्चों की भाषाई विकास की प्रक्रिया" (Unit 7) का दूसरा उप-भाग है, जो पूछता है: बच्चे भाषा वास्तव में कैसे सीखते हैं? इसके उत्तर में कई प्रतिस्पर्धी व पूरक सिद्धांत प्रस्तावित किए गए हैं।
एक शिक्षक के लिए इन सिद्धांतों की समझ आवश्यक है क्योंकि यह शिक्षण-पद्धति की पसंद को सीधे प्रभावित करती है — क्या भाषा सिखाने के लिए दोहराव-अभ्यास पर्याप्त है, या बच्चों को सक्रिय, सामाजिक भाषा-प्रयोग के अवसर देना ज़्यादा प्रभावी है?
विस्तृत व्याख्या
आधारभूत बातें
- भाषा-अर्जन (Language Acquisition) की व्याख्या के लिए मुख्यतः चार सिद्धांत/दृष्टिकोण प्रस्तावित हैं: अनुकरण (व्यवहारवादी), जन्मजात (नेटिविस्ट), सामाजिक-अंतःक्रिया, संज्ञानात्मक।
अनुकरण/व्यवहारवादी सिद्धांत (स्किनर)
इस दृष्टिकोण के अनुसार बच्चे बड़ों की भाषा की नकल करके व सही बोलने पर मिलने वाले सुदृढ़ीकरण (प्रशंसा, ध्यान) से भाषा सीखते हैं।
- उदाहरण: बच्चा "पानी" कहता है, मां खुश होकर पानी देती है — यह सकारात्मक सुदृढ़ीकरण उसे यह शब्द दोबारा प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- सीमा: यह सिद्धांत "मैं जाया" जैसी त्रुटियों की व्याख्या नहीं कर पाता, क्योंकि बच्चे ने यह गलत रूप कभी सुना ही नहीं होता — शुद्ध नकल से यह त्रुटि नहीं बन सकती।
जन्मजात सिद्धांत (चॉम्स्की)
भाषाविद् नोम चॉम्स्की के अनुसार मनुष्य के मस्तिष्क में जन्म से ही एक भाषा-अर्जन युक्ति (Language Acquisition Device - LAD) होती है, जो सार्वभौमिक व्याकरण (Universal Grammar) के सिद्धांतों को पहचानने व लागू करने में सक्षम होती है।
- "मैं जाया" जैसी त्रुटियां इसी सिद्धांत का प्रमाण मानी जाती हैं — बच्चा सक्रिय रूप से भाषा के नियम निकाल (extract) रहा है, न कि केवल सुनी हुई बातें दोहरा रहा है।
सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत (वायगोत्स्की)
इस दृष्टिकोण के अनुसार भाषा मुख्यतः सामाजिक अंतःक्रिया से सीखी जाती है — बड़े/अधिक सक्षम व्यक्ति बच्चे को उसकी वर्तमान क्षमता से थोड़ा आगे तक "सहारा" (स्कैफोल्डिंग) देकर भाषा-विकास में सहायता करते हैं।
- उदाहरण: मां बच्चे के अधूरे वाक्य को दोहराते हुए पूर्ण, सही रूप में वापस कहती है ("पानी" → "हां, तुम्हें पानी चाहिए")।
संज्ञानात्मक सिद्धांत (पियाजे)
इस दृष्टिकोण के अनुसार भाषा-विकास बच्चे के समग्र संज्ञानात्मक (सोचने-समझने की) विकास पर निर्भर करता है — भाषा तभी विकसित होती है जब संबंधित संज्ञानात्मक क्षमता (जैसे वस्तु-स्थायित्व की समझ) पहले से विकसित हो चुकी हो।
चार सिद्धांतों की तुलना
| सिद्धांत | प्रस्तावक | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| अनुकरण/व्यवहारवादी | स्किनर | नकल + सुदृढ़ीकरण |
| जन्मजात | चॉम्स्की | जन्मजात LAD, सार्वभौमिक व्याकरण |
| सामाजिक-अंतःक्रिया | वायगोत्स्की | सामाजिक सहारा (स्कैफोल्डिंग) |
| संज्ञानात्मक | पियाजे | संज्ञानात्मक विकास पर निर्भर |
शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता
- शिक्षण-पद्धति चयन: यदि केवल अनुकरण-सिद्धांत पर भरोसा किया जाए, तो शिक्षण दोहराव-आधारित बनेगा; सामाजिक-अंतःक्रिया सिद्धांत को अपनाने पर शिक्षक बातचीत, प्रश्नोत्तर व सहयोगात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता देगा — यह चयन कक्षा के वातावरण को गहराई से प्रभावित करता है।
- त्रुटियों के प्रति दृष्टिकोण: जन्मजात सिद्धांत को समझने से शिक्षक "मैं जाया" जैसी त्रुटियों को गलती न मानकर, भाषा-नियम-निर्माण की एक स्वस्थ, स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में देख पाता है।
यह कैसे जुड़ता है — भाषा-अर्जन सिद्धांत व पूर्व लेखों की कड़ी
- अतिसामान्यीकरण त्रुटि व क्रिया-रूप की कड़ी: पूर्व "क्रिया" लेख में सीखी नियमित क्रिया-रचना का पैटर्न बच्चे "मैं जाया" जैसी त्रुटियों में अनियमित क्रियाओं पर भी लागू कर देते हैं (अतिसामान्यीकरण/overgeneralization) — यह जन्मजात सिद्धांत का ठोस, व्याकरण-आधारित प्रमाण है।
- स्कैफोल्डिंग व भाषा-विकास चरणों की कड़ी: पूर्व "भाषा विकास के चरण" लेख में सीखा टेलीग्राफिक अवस्था से जटिल वाक्य अवस्था तक की यात्रा सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत के "स्कैफोल्डिंग" (वयस्कों द्वारा दिया सहारा) से तेज़ होती है — यह दिखाता है कि चरण व सिद्धांत एक-दूसरे के पूरक हैं।
- व्याकरण-नियम व सार्वभौमिक व्याकरण की कड़ी: इस पूरी सीरीज़ में सीखे गए व्याकरण-नियम (कारक, संधि, समास आदि) चॉम्स्की के अनुसार किसी हद तक सार्वभौमिक व्याकरण-सिद्धांतों की भाषा-विशिष्ट अभिव्यक्ति हैं — यह भाषा-अध्ययन को गहरे, संज्ञानात्मक स्तर से जोड़ता है।
- CG-विशिष्ट — द्विभाषी बच्चों में सामाजिक-अंतःक्रिया की भूमिका: छत्तीसगढ़ के बहुभाषी परिवेश में बच्चे घर पर छत्तीसगढ़ी व स्कूल में मानक हिंदी के बीच सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से सेतु बनाना सीखते हैं — यह वायगोत्स्की के सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत की व्यावहारिक, स्थानीय-प्रासंगिक अभिव्यक्ति है, जो आगामी "समावेशी कक्षा" लेख में और विस्तृत होगी।
परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
भाषा-अर्जन के सिद्धांत CGSSB सिलेबस Unit 7 का महत्वपूर्ण उप-भाग है, विशेषकर चॉम्स्की व वायगोत्स्की के सिद्धांतों की पहचान पर केंद्रित प्रश्न सामान्यतः पूछे जाते हैं।
स्मृति सहायक
"अनु-जन्म-समाज-संज्ञान" — अनुकरण (स्किनर), जन्मजात (चॉम्स्की), सामाजिक-अंतःक्रिया (वायगोत्स्की), संज्ञानात्मक (पियाजे) — चार सिद्धांतों व उनके प्रस्तावकों को याद रखने के लिए।
सामान्य कक्षा गतिविधियां
- बच्चों की स्वाभाविक भाषा-त्रुटियों (जैसे अतिसामान्यीकरण) को नोट करने व चर्चा करने की गतिविधि, ताकि शिक्षक इन्हें विकासात्मक संकेत के रूप में पहचानना सीखें।
- सामाजिक-अंतःक्रिया आधारित भाषा-गतिविधियां (जोड़ी-वार्तालाप, कहानी-सुनाना) डिज़ाइन करना, जो वायगोत्स्की के सिद्धांत को व्यवहार में लागू करें।
छत्तीसगढ़ पक्ष
भाषा-अर्जन के चार सिद्धांत सार्वभौमिक शिक्षाशास्त्रीय सिद्धांत हैं, जो किसी भी भाषा-समुदाय पर लागू होते हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ के बहुभाषी ग्रामीण परिवेश में सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि घर व स्कूल की भाषाओं के बीच सेतु बनाने में सामाजिक समर्थन (परिवार, शिक्षक, साथी) की भूमिका केंद्रीय होती है।
उदाहरण
- सिद्धांत-पहचान (व्यवहारवादी): बच्चा "पानी" कहता है, मां खुश होकर पानी देती है, जिससे बच्चा यह शब्द दोबारा प्रयोग करता है — यह किस सिद्धांत का उदाहरण है? → अनुकरण/व्यवहारवादी सिद्धांत (सुदृढ़ीकरण)।
- सिद्धांत-पहचान (जन्मजात): एक बच्चा "मैं जाया" कहता है, जबकि उसने यह गलत रूप कभी नहीं सुना — यह किस सिद्धांत का प्रमाण माना जाता है? → जन्मजात सिद्धांत (चॉम्स्की — बच्चा नियम स्वयं निर्मित कर रहा है)।
- सिद्धांत-पहचान (सामाजिक-अंतःक्रिया): मां बच्चे के अधूरे वाक्य को पूर्ण, सही रूप में दोहराती है — यह किस सिद्धांत का उदाहरण है? → सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत (वायगोत्स्की — स्कैफोल्डिंग)।
- प्रस्तावक-मिलान: LAD (भाषा-अर्जन युक्ति) की अवधारणा किसने प्रस्तावित की? → नोम चॉम्स्की।
- व्यवहारवाद की सीमा: व्यवहारवादी सिद्धांत "मैं जाया" जैसी त्रुटि की व्याख्या क्यों नहीं कर पाता? → क्योंकि यह त्रुटि कभी सुनी या नकल नहीं की गई, यह शुद्ध नकल-सिद्धांत के विपरीत है।
- स्कैफोल्डिंग तर्क: "स्कैफोल्डिंग" शब्द का भाषा-अर्जन में क्या अर्थ है? → बच्चे को उसकी वर्तमान क्षमता से थोड़ा आगे तक ले जाने के लिए वयस्कों/अधिक सक्षम व्यक्तियों द्वारा दिया गया सहारा।
- प्रस्तावक-मिलान (2): सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत किसने प्रस्तावित किया? → लेव वायगोत्स्की।
- CG-विशिष्ट — द्विभाषी संदर्भ में सिद्धांत-प्रयोग: छत्तीसगढ़ के द्विभाषी बच्चे को स्कूल में मानक हिंदी सीखने में शिक्षक व सहपाठियों की मदद किस सिद्धांत का उदाहरण है? → सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत (सामाजिक सहारा से भाषा-सेतु निर्माण)।
- संज्ञानात्मक सिद्धांत तर्क: पियाजे के अनुसार भाषा-विकास किस पर निर्भर करता है? → समग्र संज्ञानात्मक (सोचने-समझने की) विकास पर।
- बहु-सिद्धांत संश्लेषण: क्या ये चार सिद्धांत परस्पर विरोधी हैं या पूरक? → अधिकांश आधुनिक विचारक इन्हें पूरक मानते हैं — प्रत्येक भाषा-अर्जन के अलग पहलू को उजागर करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य / तालिका
| सिद्धांत | प्रस्तावक | केंद्रीय अवधारणा |
|---|---|---|
| अनुकरण/व्यवहारवादी | स्किनर | नकल, सुदृढ़ीकरण |
| जन्मजात | चॉम्स्की | LAD, सार्वभौमिक व्याकरण |
| सामाजिक-अंतःक्रिया | वायगोत्स्की | स्कैफोल्डिंग |
| संज्ञानात्मक | पियाजे | संज्ञानात्मक विकास |
सामान्य भ्रांतियां
- यह मान लेना कि केवल एक ही सिद्धांत "सही" है, बाकी गलत। आधुनिक भाषाविज्ञान इन सिद्धांतों को परस्पर-पूरक मानता है, प्रत्येक भाषा-अर्जन के अलग पहलू पर प्रकाश डालता है।
- अतिसामान्यीकरण त्रुटियों (जैसे 'मैं जाया') को केवल अज्ञानता समझना। यह वास्तव में सक्रिय, बुद्धिमान नियम-निर्माण प्रक्रिया का प्रमाण है, कमज़ोरी नहीं।
- स्कैफोल्डिंग को केवल औपचारिक शिक्षण समझना। यह अनौपचारिक, रोज़मर्रा की बातचीत में भी लगातार होती है (जैसे मां का बच्चे के अधूरे वाक्य को दोहराना)।
- व्यवहारवादी सिद्धांत को पूर्णतः अप्रासंगिक मान लेना। अनुकरण व सुदृढ़ीकरण की भूमिका भाषा-अर्जन में वास्तविक है (जैसे उच्चारण-अभ्यास में), भले ही यह अकेले पूरी प्रक्रिया न समझा पाए।
- चारों सिद्धांतों के प्रस्तावकों को भ्रमित करना। परीक्षा में सटीक प्रस्तावक-सिद्धांत मिलान (स्किनर-व्यवहारवादी, चॉम्स्की-जन्मजात, वायगोत्स्की-सामाजिक, पियाजे-संज्ञानात्मक) महत्वपूर्ण है।
पूर्व वर्ष के प्रश्न पैटर्न
एक प्रत्यक्ष खोज में इस उप-विषय (भाषा-अर्जन सिद्धांत) पर सटीक, उद्धरण-योग्य CG व्यापम प्रश्न-पाठ इस सत्र में उपलब्ध स्रोतों से पुष्टि नहीं हो सका, इसलिए — बताए गए फॉलबैक नियम के अनुसार — यह खंड CGSSB के आधिकारिक सिलेबस-दस्तावेज़ की पुष्टि व राष्ट्रीय-स्तर CTET/REET परीक्षाओं (बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र खंड सहित) के सामान्य पैटर्न पर आधारित है।
- सिलेबस-पुष्टि (CGSSB आधिकारिक सहायक शिक्षक सिलेबस दस्तावेज़): "बच्चों की भाषाई विकास की प्रक्रिया" इकाई में भाषा-अर्जन के सिद्धांत स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध हैं।
- प्रस्तावक-मिलान पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक सिद्धांत/अवधारणा देकर उसका सही प्रस्तावक चुनने वाले प्रश्न — यह सबसे सामान्य प्रारूप है।
- उदाहरण-आधारित पहचान पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक कक्षा/घरेलू परिदृश्य देकर वह किस सिद्धांत का उदाहरण है, पूछने वाले प्रश्न।
स्रोत के बारे में ईमानदार टिप्पणी: इस उप-विषय पर सटीक, प्रत्यक्ष CG-विशिष्ट प्रश्न-पाठ की पुष्टि नहीं हो सकी, पर आधिकारिक सिलेबस दस्तावेज़ इस विषय के परीक्षा-योग्य होने की पुष्टि करता है। किसी भी कोचिंग सामग्री के विशिष्ट वर्ष/प्रश्न के दावे को भरोसा करने से पहले आधिकारिक उत्तर कुंजी से जांचें।
स्वयं जांचें
- क्या आप भाषा-अर्जन के चार सिद्धांत व उनके प्रस्तावक बता सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं "मैं जाया" जैसी त्रुटि जन्मजात सिद्धांत का प्रमाण क्यों मानी जाती है?
- क्या आप स्कैफोल्डिंग की अवधारणा एक उदाहरण से समझा सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं व्यवहारवादी सिद्धांत की मुख्य सीमा क्या है?
- क्या आप छत्तीसगढ़ के द्विभाषी परिवेश में सामाजिक-अंतःक्रियावादी सिद्धांत का एक उदाहरण दे सकते हैं?
- क्या आप बता सकते हैं ये चार सिद्धांत परस्पर-विरोधी हैं या पूरक?