प
ParikshaSangwari
अध्ययन सामग्री
/
7 दिन
डैशबोर्ड
परीक्षा
पुराने पेपर
1
एग्जाम सीरीज़
0
अभ्यास क्विज़
48
विषय चुनें
⏳ Sahayak Shikshak 2026
77
दिन बाकी हैं
अध्ययन स्ट्रीक
0
विषय हब
🖋 हिन्दी🔤 अंग्रेजी➗ गणित🌳 पर्यावरण अध्ययन🧠 बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र🎲 सामान्य मानसिक योग्यता💻 कम्प्यूटर शिक्षा📚 सामान्य ज्ञान
क्विक लिंक
लेखअभ्यास क्विज़पुराने पेपरएग्जाम सीरीज़
हमें फॉलो करें
Instagram
डैशबोर्ड
पुराने पेपर
एग्जाम सीरीज़
अभ्यास क्विज़
होम
/
हिन्दी
/
पद व पद भेद
/
क्रिया: सकर्मक-अकर्मक भेद व संयुक्त-प्रेरणार्थक रूप
🖋 हिन्दी
सरल

क्रिया: सकर्मक-अकर्मक भेद व संयुक्त-प्रेरणार्थक रूप

⏱ 13 मिनट
👁 1
📅 21 अगस्त 2026

हिंदी क्रिया के भेद क्या हैं?

'बच्चा सोता है' — यह वाक्य पूर्ण है, इसमें किसी अतिरिक्त वस्तु (कर्म) की ज़रूरत नहीं। पर 'बच्चा किताब पढ़ता है' में 'किताब' के बिना वाक्य अधूरा लगता है — यह सकर्मक-अकर्मक भेद CG TET/CGPSC में नियमित पूछा जाता है।

परिचय

"बच्चा सोता है" — यह वाक्य पूर्ण है, इसमें किसी अतिरिक्त वस्तु/व्यक्ति (कर्म) की आवश्यकता नहीं। पर "बच्चा किताब पढ़ता है" में "किताब" के बिना वाक्य अधूरा-सा लगता है — "बच्चा पढ़ता है" कहने पर सुनने वाला पूछ सकता है "क्या पढ़ता है?" यह भेद — कर्म की आवश्यकता होना या न होना — क्रिया के सबसे मौलिक वर्गीकरण (सकर्मक-अकर्मक) की कुंजी है।

क्रिया वह शब्द है जिससे किसी कार्य के करने या होने का बोध हो। यह "पद व पद भेद" (Unit 4) का अंतिम व सबसे जटिल उप-भाग है, क्योंकि क्रिया वाक्य की धुरी होती है — हर पूर्ण वाक्य में एक क्रिया अनिवार्य है।

एक शिक्षक के लिए क्रिया-भेदों की समझ आवश्यक है क्योंकि यह वाक्य-रचना की शुद्धता (जैसे कर्म भूल जाने से अधूरा वाक्य बनना) व बच्चों के भाषा-विकास दोनों से सीधे जुड़ी है।

विस्तृत व्याख्या

आधारभूत बातें

  • क्रिया का मूल, बिना काल/कर्ता के प्रभाव वाला रूप धातु कहलाता है (जैसे "पढ़ना" की धातु "पढ़")।
  • क्रिया को दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है: कर्म की उपस्थिति के आधार पर (सकर्मक/अकर्मक) व रचना के आधार पर (सामान्य, संयुक्त, प्रेरणार्थक, पूर्वकालिक)।

कर्म के आधार पर भेद

सकर्मक क्रिया — जिस क्रिया के साथ कर्म (जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े) की आवश्यकता हो।

  • "राम किताब पढ़ता है" (किताब = कर्म, बिना कर्म के अर्थ अधूरा)।
  • अन्य उदाहरण: खाना, लिखना, बनाना, पढ़ाना।

अकर्मक क्रिया — जिस क्रिया के साथ कर्म की आवश्यकता न हो, क्रिया का प्रभाव कर्ता पर ही सीमित रहे।

  • "बच्चा सोता है" (कोई कर्म आवश्यक नहीं, वाक्य पूर्ण है)।
  • अन्य उदाहरण: हंसना, रोना, दौड़ना, सोना।

रचना के आधार पर भेद

सामान्य क्रिया — एक ही क्रिया-रूप से बना वाक्य।

  • "वह जाता है।"

संयुक्त क्रिया — दो या अधिक क्रियाएं मिलकर एक संयुक्त भाव व्यक्त करें (मुख्य क्रिया + सहायक क्रिया)।

  • "वह जा सकता है" (संभावना का भाव), "वह खा चुका है" (पूर्णता का भाव)।

प्रेरणार्थक क्रिया — जिससे यह बोध हो कि कर्ता स्वयं कार्य न कर, किसी दूसरे से करवाता है।

  • "मां बच्चे को पढ़ाती है" (पढ़ना → पढ़ाना — मां स्वयं नहीं पढ़ रही, बच्चे को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है)।
  • अन्य उदाहरण: सुनना→सुनाना, लिखना→लिखवाना, खाना→खिलाना।

पूर्वकालिक क्रिया — जो मुख्य क्रिया से पहले पूर्ण हो चुकी घटना बताए, प्रायः "-कर" रूप में।

  • "खाना खाकर वह सो गया" ("खाकर" पूर्वकालिक क्रिया है, यह "सोने" से पहले पूर्ण हो चुकी घटना बताती है)।

क्रिया-भेदों की तुलना

आधारभेदपहचानउदाहरण
कर्मसकर्मककर्म आवश्यककिताब पढ़ता है
कर्मअकर्मककर्म आवश्यक नहींबच्चा सोता है
रचनासंयुक्तदो क्रियाएं मिलकर एक भावजा सकता है
रचनाप्रेरणार्थकदूसरे से कार्य करवानापढ़ाती है
रचनापूर्वकालिकपहले पूर्ण हुई घटनाखाकर सो गया

शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता

  • वाक्य-शुद्धता सिखाना: सकर्मक क्रिया के साथ कर्म भूल जाने से वाक्य अधूरा बनता है ("वह पढ़ता है" — क्या पढ़ता है?) — यह बच्चों के लेखन में सामान्य त्रुटि है, जिसे यह ज्ञान सुधारता है।
  • प्रेरणार्थक क्रिया व शिक्षण-भूमिका की कड़ी: "पढ़ाना" (पढ़ना का प्रेरणार्थक रूप) शब्द स्वयं शिक्षक की भूमिका को दर्शाता है — यह एक स्वाभाविक, कक्षा-प्रासंगिक उदाहरण है।

यह कैसे जुड़ता है — क्रिया व पूर्व लेखों की कड़ी

  1. सकर्मक क्रिया व कारक "कर्म" की सीधी कड़ी: पूर्व "कारक" लेख में सीखा कर्म कारक (चिन्ह "को") ठीक उन्हीं क्रियाओं के साथ प्रयुक्त होता है जो सकर्मक हैं — यह दिखाता है कि क्रिया-भेद व कारक-ज्ञान परस्पर जुड़े हैं।
  2. प्रेरणार्थक क्रिया व प्रत्यय-लेख की कड़ी: "पढ़ना→पढ़ाना" में जुड़ा प्रत्यय ("आ") ठीक वही कृत्-प्रत्यय की प्रक्रिया है जो पूर्व "प्रत्यय" लेख में सीखी गई — यह दिखाता है कि क्रिया-रूपांतरण भी शब्द-रचना (प्रत्यय) के सिद्धांतों पर आधारित है।
  3. पूर्वकालिक क्रिया व वाक्य-जटिलता की कड़ी: "खाना खाकर वह सो गया" जैसे वाक्य दो घटनाओं को एक वाक्य में जोड़ते हैं — यह आगामी "वाक्य के भेद" लेख में सीखे जाने वाले संयुक्त/मिश्र वाक्यों की नींव है।
  4. CG-विशिष्ट — शिक्षक की भूमिका व प्रेरणार्थक क्रिया: "पढ़ाना" शब्द (पढ़ना का प्रेरणार्थक रूप) छत्तीसगढ़ सहित हर हिंदी-भाषी क्षेत्र में शिक्षक के मूल कार्य को दर्शाता है — यद्यपि यह भाषिक तथ्य राज्य-विशिष्ट नहीं, यह सहायक शिक्षक परीक्षा की प्रकृति (शिक्षण-कार्य) से सीधा, सार्थक जुड़ाव रखता है।

परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

क्रिया CGSSB सिलेबस Unit 4 का अंतिम व अत्यंत नियमित रूप से पूछा जाने वाला उप-भाग है, विशेषकर सकर्मक-अकर्मक भेद व प्रेरणार्थक क्रिया की पहचान पर केंद्रित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

स्मृति सहायक

"सकर्मक = कर्म साथ चाहिए, अकर्मक = कर्म की ज़रूरत नहीं" — सकर्मक-अकर्मक भेद याद रखने के लिए। प्रेरणार्थक के लिए: "जो खुद न करे, दूसरे से करवाए — प्रेरणार्थक"।

सामान्य कक्षा गतिविधियां

  • "कर्म खोजो" गतिविधि — सकर्मक क्रिया वाले अधूरे वाक्य (जैसे "राम ___ खाता है") देकर बच्चों से उपयुक्त कर्म भरने को कहना।
  • प्रेरणार्थक-क्रिया जोड़ी गतिविधि — मूल क्रिया (पढ़ना, सुनना, खाना) व उनके प्रेरणार्थक रूप (पढ़ाना, सुनाना, खिलाना) मिलाने का खेल।

छत्तीसगढ़ पक्ष

क्रिया के भेदों का सिद्धांत सार्वभौमिक/मानक हिंदी व्याकरण का भाग है, राज्य के अनुसार बदलता नहीं। हालांकि, "पढ़ाना" (प्रेरणार्थक क्रिया) शब्द शिक्षक की भूमिका से सीधा, स्वाभाविक जुड़ाव रखता है, जो सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रकृति के लिए विशेष रूप से सार्थक व यादगार उदाहरण बनता है।

उदाहरण

  1. सकर्मक पहचान: "राम किताब पढ़ता है" में क्रिया सकर्मक है या अकर्मक, व क्यों? → सकर्मक — "किताब" कर्म है, जिसके बिना अर्थ अधूरा है।
  2. अकर्मक पहचान: "बच्चा सोता है" में क्रिया सकर्मक है या अकर्मक, व क्यों? → अकर्मक — कोई कर्म आवश्यक नहीं, वाक्य पूर्ण है।
  3. संयुक्त क्रिया पहचान: "वह जा सकता है" में संयुक्त क्रिया कौन-सी है? → जा सकता है (मुख्य क्रिया "जा" + सहायक क्रिया "सकता है", संभावना का भाव)।
  4. प्रेरणार्थक क्रिया निर्माण: "पढ़ना" क्रिया का प्रेरणार्थक रूप क्या है? → पढ़ाना।
  5. पूर्वकालिक क्रिया पहचान: "खाना खाकर वह सो गया" में पूर्वकालिक क्रिया कौन-सी है? → खाकर (सोने से पहले पूर्ण हुई घटना)।
  6. प्रेरणार्थक क्रिया (दूसरा): "सुनना" क्रिया का प्रेरणार्थक रूप क्या है? → सुनाना।
  7. धातु पहचान: "पढ़ना" क्रिया की धातु क्या है? → पढ़।
  8. CG-विशिष्ट — शिक्षण-संदर्भ विश्लेषण: "पढ़ाना" शब्द किस मूल क्रिया से बना है, व यह किस क्रिया-भेद का उदाहरण है? → मूल क्रिया "पढ़ना", यह प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण है (शिक्षक बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है)।
  9. सकर्मक-अकर्मक तुलना: "पक्षी उड़ता है" व "पक्षी दाना चुगता है" में कौन अकर्मक है व कौन सकर्मक? → "पक्षी उड़ता है" अकर्मक, "पक्षी दाना चुगता है" सकर्मक (दाना = कर्म)।
  10. संयुक्त क्रिया (दूसरा): "वह खाना खा चुका है" में संयुक्त क्रिया कौन-सी है, व क्या भाव देती है? → खा चुका है (पूर्णता का भाव)।

महत्वपूर्ण तथ्य / तालिका

क्रिया भेदआधारपहचानउदाहरण
सकर्मककर्मकर्म आवश्यककिताब पढ़ता है
अकर्मककर्मकर्म आवश्यक नहींबच्चा सोता है
सामान्यरचनाएक क्रिया-रूपवह जाता है
संयुक्तरचनामुख्य+सहायक क्रियाजा सकता है
प्रेरणार्थकरचनादूसरे से करवानापढ़ाती है
पूर्वकालिकरचनापहले पूर्ण घटनाखाकर सो गया

सामान्य भ्रांतियां

  1. सकर्मक व अकर्मक क्रिया को वाक्य में शब्दों की संख्या से तय करने की कोशिश करना। भेद कर्म की आवश्यकता पर आधारित है, वाक्य की लंबाई पर नहीं — कुछ अकर्मक वाक्य भी लंबे हो सकते हैं ("बच्चा बगीचे में खेलता है" — यह भी अकर्मक है, "बगीचे में" कर्म नहीं, स्थान है)।
  2. प्रेरणार्थक क्रिया को संयुक्त क्रिया समझना। प्रेरणार्थक क्रिया एक ही क्रिया का रूपांतरित रूप है (पढ़ना→पढ़ाना), जबकि संयुक्त क्रिया दो अलग क्रियाएं मिलकर बनती है (जा+सकता है)।
  3. पूर्वकालिक क्रिया को मुख्य क्रिया समझना। "खाकर" जैसी पूर्वकालिक क्रिया मुख्य क्रिया नहीं, बल्कि उससे पहले घटी सहायक घटना बताती है — वाक्य की मुख्य क्रिया कुछ और होती है ("सो गया")।
  4. हर क्रिया को सकर्मक या अकर्मक में स्थिर रूप से बांधना। कुछ क्रियाएं संदर्भ के अनुसार दोनों रूप में प्रयुक्त हो सकती हैं (जैसे "वह पढ़ता है" अकर्मक जैसा, पर "वह किताब पढ़ता है" सकर्मक) — संदर्भ महत्वपूर्ण है।
  5. धातु व क्रिया को एक ही समझना। धातु क्रिया का मूल, बिना काल/कर्ता के रूप है (पढ़), जबकि क्रिया पूर्ण, प्रयुक्त रूप है (पढ़ता है, पढ़ा, पढ़ेगा)।

पूर्व वर्ष के प्रश्न पैटर्न

एक प्रत्यक्ष खोज में इस उप-विषय (क्रिया) पर सटीक, उद्धरण-योग्य CG व्यापम प्रश्न-पाठ इस सत्र में उपलब्ध स्रोतों से पुष्टि नहीं हो सका, इसलिए — बताए गए फॉलबैक नियम के अनुसार — यह खंड CGSSB के आधिकारिक सिलेबस-दस्तावेज़ की पुष्टि व राष्ट्रीय-स्तर CTET/REET परीक्षाओं के सामान्य पैटर्न पर आधारित है।

  1. सिलेबस-पुष्टि (CGSSB आधिकारिक सहायक शिक्षक सिलेबस दस्तावेज़): "पद व पद भेद" इकाई में क्रिया को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है।
  2. सकर्मक-अकर्मक पहचान पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक वाक्य देकर क्रिया सकर्मक है या अकर्मक, पूछने वाले प्रश्न — यह सबसे सामान्य प्रारूप है।
  3. प्रेरणार्थक-रूप निर्माण पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक क्रिया देकर उसका सही प्रेरणार्थक रूप चार विकल्पों में से चुनने वाले प्रश्न।

स्रोत के बारे में ईमानदार टिप्पणी: इस उप-विषय पर सटीक, प्रत्यक्ष CG-विशिष्ट प्रश्न-पाठ की पुष्टि नहीं हो सकी, पर आधिकारिक सिलेबस दस्तावेज़ इस विषय के परीक्षा-योग्य होने की पुष्टि करता है। किसी भी कोचिंग सामग्री के विशिष्ट वर्ष/प्रश्न के दावे को भरोसा करने से पहले आधिकारिक उत्तर कुंजी से जांचें।

स्वयं जांचें

  1. क्या आप सकर्मक व अकर्मक क्रिया के बीच का मूल अंतर बता सकते हैं?
  2. क्या आप "पढ़ना" का प्रेरणार्थक रूप बता सकते हैं?
  3. क्या आप संयुक्त क्रिया व प्रेरणार्थक क्रिया के बीच का भेद समझा सकते हैं?
  4. क्या आप एक पूर्वकालिक क्रिया वाला वाक्य बना सकते हैं?
  5. क्या आप बता सकते हैं धातु व क्रिया में क्या अंतर है?
  6. क्या आप "पढ़ाना" शब्द व शिक्षक की भूमिका के बीच का संबंध समझा सकते हैं?
Sahayak ShikshakHindiCTET

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

'राम किताब पढ़ता है' में क्रिया सकर्मक है या अकर्मक?

'बच्चा सोता है' में क्रिया सकर्मक है या अकर्मक?

'पढ़ना' क्रिया का प्रेरणार्थक रूप क्या है?

'वह जा सकता है' में संयुक्त क्रिया कौन-सी है?

'खाना खाकर वह सो गया' में पूर्वकालिक क्रिया कौन-सी है?

'पढ़ना' क्रिया की धातु क्या है?

प्रेरणार्थक क्रिया व संयुक्त क्रिया में मूल अंतर क्या है?

'सुनना' क्रिया का प्रेरणार्थक रूप क्या है?

🧭 इस लेख में
📌 मुख्य बिंदु
●
क्रिया वह शब्द है जिससे कार्य के करने/होने का बोध हो; धातु क्रिया का मूल रूप है (पढ़ना→पढ़)।
●
कर्म के आधार पर दो भेद: सकर्मक (कर्म आवश्यक — किताब पढ़ता है) व अकर्मक (कर्म आवश्यक नहीं — सोता है)।
●
रचना के आधार पर चार भेद: सामान्य, संयुक्त, प्रेरणार्थक, पूर्वकालिक।
●
संयुक्त क्रिया दो क्रियाएं मिलकर एक भाव देती है — जा सकता है, खा चुका है।
●
प्रेरणार्थक क्रिया दूसरे से कार्य करवाने का बोध कराती है — पढ़ना→पढ़ाना, सुनना→सुनाना।
●
पूर्वकालिक क्रिया मुख्य क्रिया से पहले पूर्ण हुई घटना बताती है — खाकर सो गया।
●
सकर्मक क्रिया कारक 'कर्म' (चिन्ह 'को') से जुड़ी है, प्रेरणार्थक क्रिया प्रत्यय-प्रक्रिया से बनती है।
●
'पढ़ाना' (प्रेरणार्थक) शब्द शिक्षक की भूमिका से स्वाभाविक जुड़ाव रखता है।
अभ्यास क्विज़
हिन्दी अभ्यास — आसान 1
इस टॉपिक की क्विज़ खेलें →
संबंधित लेख
बच्चों में भाषा क्षमता के आकलन के संभावित तरीके
⏱ 12 मिनट · 👁 7
बहुभाषिकता: छत्तीसगढ़ की बहुभाषी कक्षा में शिक्षण
⏱ 14 मिनट · 👁 7
भाषा सीखने की प्रक्रिया के गुण: स्वाभाविकता से रचनात्मकता तक
⏱ 12 मिनट · 👁 6
बच्चे भाषा कैसे सीखते हैं: प्रमुख सिद्धांत व दृष्टिकोण
⏱ 13 मिनट · 👁 6