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प्रत्यय: कृत् व तद्धित प्रत्ययों की पहचान
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सरल

प्रत्यय: कृत् व तद्धित प्रत्ययों की पहचान

⏱ 12 मिनट
👁 1
📅 21 अगस्त 2026

कृत् व तद्धित प्रत्यय क्या हैं?

क्रिया 'पढ़ना' के अंत में 'आई' जोड़ने पर बनता है 'पढ़ाई' — यह क्रिया से बनी संज्ञा है। अब संज्ञा 'लोहा' से 'आर' जोड़कर 'लोहार' बनता है — पर मूल शब्द अलग प्रकार का। यह भेद CG TET/CGPSC में नियमित पूछा जाता है।

परिचय

क्रिया "पढ़ना" के अंत में "आई" जोड़ने पर बनता है "पढ़ाई" — यह एक संज्ञा है जो किसी क्रिया से बनी। अब संज्ञा "लोहा" के अंत में "आर" जोड़ने पर बनता है "लोहार" — यह भी एक शब्द है, पर मूल शब्द क्रिया नहीं, संज्ञा है। दोनों में अंत में कुछ जुड़ा है, पर मूल शब्द का प्रकार अलग है — यही प्रत्ययों के दो मुख्य भेद (कृत् व तद्धित) समझने की शुरुआत है।

प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द या नया शब्द-रूप बनाते हैं। उपसर्ग की तरह ही, यह भी "शब्द रचना" (Unit 3) का महत्वपूर्ण उप-भाग है।

एक शिक्षक के लिए प्रत्ययों की समझ आवश्यक है क्योंकि यह बच्चों को यह सिखाने में मदद करती है कि हिंदी में क्रिया से संज्ञा, संज्ञा से विशेषण, विशेषण से भाववाचक संज्ञा जैसे शब्द-रूपांतरण किस प्रकार व्यवस्थित नियमों से होते हैं।

विस्तृत व्याख्या

आधारभूत बातें

  • प्रत्यय = "प्रति" (पश्चात्/बाद में) + "अय" (चलने वाला) — यानी वह जो किसी शब्द के "बाद" जुड़ता है।
  • प्रत्यय सदैव शब्द के अंत में जुड़ते हैं (उपसर्ग के विपरीत, जो आरंभ में जुड़ते हैं)।
  • प्रत्ययों के दो मुख्य भेद हैं: कृत् प्रत्यय व तद्धित प्रत्यय।

कृत् प्रत्यय

वे प्रत्यय जो क्रिया (धातु) के साथ जुड़कर संज्ञा, विशेषण या अन्य शब्द-रूप बनाते हैं।

मूल क्रियाप्रत्ययबना शब्दशब्द-भेद
पढ़आईपढ़ाईसंज्ञा
लिखआवटलिखावटसंज्ञा
घूमअक्कड़घुमक्कड़विशेषण/संज्ञा
चलताचलता (हुआ)विशेषण (वर्तमान कृदंत)
करने वालाकरने वालाविशेषण (कर्तृवाचक)
खेलआड़ीखिलाड़ीसंज्ञा

तद्धित प्रत्यय

वे प्रत्यय जो संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण (क्रिया नहीं) के साथ जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।

मूल शब्दप्रत्ययबना शब्दअर्थ/भाव
लोहाआरलोहारपेशा/व्यवसाय
सोनाआरसुनारपेशा/व्यवसाय
ईमानदारईमानदारगुणवाचक
समझदारसमझदारगुणवाचक
मीठाआसमिठासभाववाचक
बच्चापनबचपनभाववाचक
गरीबईगरीबीभाववाचक
मनुष्यतामनुष्यताभाववाचक

कृत् व तद्धित में स्पष्ट भेद

आधारकृत् प्रत्ययतद्धित प्रत्यय
मूल शब्द का प्रकारक्रिया (धातु)संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण
उदाहरणपढ़+आई=पढ़ाईलोहा+आर=लोहार
बनने वाला शब्दप्रायः संज्ञा/विशेषणसंज्ञा/विशेषण

शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता

  • शब्द-भंडार विस्तार: एक मूल शब्द से अलग-अलग प्रत्यय जोड़कर कई संबंधित शब्द बनाना सिखाया जा सकता है (जैसे "समझ" से "समझदार", "समझदारी", "समझौता")।
  • लेखन-कौशल सुधार: भाववाचक संज्ञा बनाने वाले प्रत्यय (ता, पन, ई, आस) सिखाने से बच्चे अमूर्त भाव (जैसे "मनुष्यता", "बचपन") सही ढंग से व्यक्त करना सीखते हैं।

यह कैसे जुड़ता है — प्रत्यय व उपसर्ग की तुलनात्मक कड़ी

  1. एक ही मूल शब्द में उपसर्ग व प्रत्यय दोनों: "समझदार" शब्द में कोई उपसर्ग नहीं, केवल प्रत्यय "दार" है; पर "बेसमझ" शब्द में उपसर्ग "बे" जुड़ता है — यह दिखाता है कि एक ही मूल शब्द ("समझ") में उपसर्ग व प्रत्यय दोनों अलग-अलग या एक साथ भी जुड़ सकते हैं (जैसे "नासमझी" में उपसर्ग "ना" व प्रत्यय "ई" दोनों)।
  2. कृत् प्रत्यय व शब्द-भेद परिवर्तन: क्रिया "पढ़ना" कृत् प्रत्यय "आई" जुड़ने पर संज्ञा "पढ़ाई" बन जाती है — यह दिखाता है कि प्रत्यय न केवल नया शब्द बनाते हैं, बल्कि शब्द का व्याकरणिक भेद (क्रिया → संज्ञा) भी बदल सकते हैं, जो आगामी "पद-भेद" (संज्ञा/क्रिया/विशेषण) वाले लेखों से जुड़ता है।
  3. तद्धित प्रत्यय व पेशा-वाचक शब्द: "लोहार", "सुनार", "कुम्हार" जैसे कई पारंपरिक पेशा-वाचक शब्द तद्धित प्रत्यय "आर" से बने हैं — यह दिखाता है कि प्रत्यय भाषा में सामाजिक-व्यावसायिक शब्दावली बनाने में भी भूमिका निभाते हैं।
  4. CG-विशिष्ट — स्थानीय पेशा-वाचक शब्द: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण/पारंपरिक समाज में भी "लोहार", "सुनार", "कुम्हार" जैसे तद्धित-प्रत्यय-निर्मित पेशा-वाचक शब्द समान रूप से प्रचलित हैं — यह दिखाता है कि प्रत्यय-निर्माण की यह प्रक्रिया क्षेत्रीय समाज में भी उतनी ही जीवंत है जितनी मानक हिंदी में।

परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

प्रत्यय CGSSB सिलेबस Unit 3 (शब्द रचना) का दूसरा प्रमुख उप-भाग है व उपसर्ग के साथ अक्सर तुलनात्मक प्रश्नों में पूछा जाता है।

स्मृति सहायक

"कृत् = क्रिया से जन्मा, तद्धित = शेष (संज्ञा/विशेषण) से जन्मा" — "कृत्" शब्द ही "क्रिया" से मिलता-जुलता है, यही याद रखने की कुंजी है।

सामान्य कक्षा गतिविधियां

  • "प्रत्यय जोड़ो" खेल — बोर्ड पर मूल क्रियाएं (पढ़, लिख, खेल) व मूल संज्ञाएं (लोहा, सोना, समझ) अलग स्तंभों में लिखकर बच्चों से उपयुक्त प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनवाना।
  • कृत् व तद्धित की छंटाई गतिविधि — मिश्रित शब्दों की सूची देकर बच्चों से दो स्तंभों (कृत्/तद्धित) में छांटने को कहना।

छत्तीसगढ़ पक्ष

प्रत्यय-निर्माण का मूल सिद्धांत सार्वभौमिक/मानक हिंदी व्याकरण का भाग है, राज्य के अनुसार बदलता नहीं। हालांकि, छत्तीसगढ़ के पारंपरिक ग्रामीण समाज में तद्धित-प्रत्यय-निर्मित पेशा-वाचक शब्दों (लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई) का प्रचलन प्रत्यय-निर्माण की व्यावहारिक, स्थानीय-परिचित प्रासंगिकता का सार्थक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उदाहरण

  1. कृत् प्रत्यय पहचान: "पढ़ाई" शब्द में मूल क्रिया व प्रत्यय क्या हैं? → मूल क्रिया "पढ़", प्रत्यय "आई"।
  2. तद्धित प्रत्यय पहचान: "लोहार" शब्द में मूल शब्द व प्रत्यय क्या हैं? → मूल शब्द "लोहा", प्रत्यय "आर"।
  3. वर्गीकरण: "समझदार" शब्द में प्रत्यय "दार" कृत् है या तद्धित? → तद्धित (मूल शब्द "समझ" संज्ञा है, क्रिया नहीं)।
  4. भाववाचक संज्ञा निर्माण: "मीठा" शब्द से भाववाचक संज्ञा बनाएं। → मिठास (मीठा+आस)।
  5. कृत् प्रत्यय (कर्तृवाचक): "खेल" क्रिया से कर्तृवाचक (करने वाला) शब्द बनाएं। → खिलाड़ी (खेल+आड़ी)।
  6. तद्धित प्रत्यय (भाववाचक): "बच्चा" शब्द से भाववाचक संज्ञा बनाएं। → बचपन (बच्चा+पन)।
  7. तुलनात्मक विश्लेषण: "पढ़ाई" व "लोहार" में कौन-सा शब्द कृत् प्रत्यय से बना है व कौन तद्धित से? → "पढ़ाई" कृत् (क्रिया से), "लोहार" तद्धित (संज्ञा से)।
  8. CG-विशिष्ट — पेशा-वाचक शब्द विश्लेषण: "कुम्हार" शब्द में मूल शब्द व प्रत्यय पहचानें, व यह छत्तीसगढ़ में किस पारंपरिक पेशे को इंगित करता है। → मूल शब्द "कुम्भ" (मिट्टी के बर्तन), प्रत्यय "आर"; यह मिट्टी के बर्तन बनाने वाले पारंपरिक पेशे को इंगित करता है, जो छत्तीसगढ़ के ग्रामीण समाज में आज भी प्रचलित है।
  9. भाववाचक संज्ञा (ता प्रत्यय): "मनुष्य" शब्द से "ता" प्रत्यय जोड़कर कौन-सा शब्द बनता है? → मनुष्यता।
  10. प्रत्यय-भेद तर्क: "करने वाला" जैसा कृदंत-रूप कृत् है या तद्धित, व क्यों? → कृत् — क्योंकि यह क्रिया "करना" से बना है, संज्ञा/विशेषण से नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य / तालिका

भेदमूल शब्द का प्रकारप्रत्यय उदाहरणबना शब्द
कृत् प्रत्ययक्रिया (धातु)आई, आवट, अक्कड़, तापढ़ाई, लिखावट, घुमक्कड़
तद्धित प्रत्ययसंज्ञा/विशेषणआर, दार, पन, ता, ईलोहार, ईमानदार, बचपन

सामान्य भ्रांतियां

  1. प्रत्यय व उपसर्ग को भ्रमित करना। प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है, उपसर्ग आरंभ में — दिशा अलग है।
  2. हर अंत-प्रत्यय को कृत् मान लेना। मूल शब्द अगर संज्ञा/विशेषण है (क्रिया नहीं), तो जुड़ा प्रत्यय तद्धित है, कृत् नहीं — जैसे "समझदार" में तद्धित, "पढ़ाई" में कृत्।
  3. यह मान लेना कि हर शब्द में प्रत्यय होता ही है। "घर", "आम" जैसे रूढ़ शब्दों में कोई प्रत्यय नहीं जुड़ा, ये अपने-आप में मूल शब्द हैं।
  4. कृत् व तद्धित से बने शब्दों को हमेशा एक ही शब्द-भेद (जैसे केवल संज्ञा) मान लेना। दोनों भेद संज्ञा व विशेषण दोनों प्रकार के शब्द बना सकते हैं, यह प्रत्यय पर निर्भर करता है।
  5. प्रत्यय जोड़ने पर वर्तनी को नज़रअंदाज़ करना। कुछ प्रत्यय जुड़ते समय मूल शब्द का अंतिम स्वर बदल जाता है (जैसे "सोना+आर" में "सोना" का "आ" हटकर "सुनार" बनता है) — यह ध्यान देने योग्य वर्तनी-नियम है।

पूर्व वर्ष के प्रश्न पैटर्न

एक प्रत्यक्ष खोज में इस उप-विषय (प्रत्यय) पर सटीक, उद्धरण-योग्य CG व्यापम प्रश्न-पाठ इस सत्र में उपलब्ध स्रोतों से पुष्टि नहीं हो सका, इसलिए — बताए गए फॉलबैक नियम के अनुसार — यह खंड CGSSB के आधिकारिक सिलेबस-दस्तावेज़ की पुष्टि व राष्ट्रीय-स्तर CTET/REET परीक्षाओं के सामान्य पैटर्न पर आधारित है।

  1. सिलेबस-पुष्टि (CGSSB आधिकारिक सहायक शिक्षक सिलेबस दस्तावेज़): "शब्द रचना" इकाई में प्रत्यय को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है।
  2. प्रत्यय-पहचान पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक शब्द देकर उसमें प्रयुक्त प्रत्यय व वह कृत् है या तद्धित, पहचानने वाले प्रश्न — यह सबसे सामान्य प्रारूप है।
  3. शब्द-निर्माण पैटर्न (राष्ट्रीय स्तर): एक मूल शब्द व एक प्रत्यय देकर बनने वाला सही शब्द चार विकल्पों में से चुनने वाले प्रश्न।

स्रोत के बारे में ईमानदार टिप्पणी: प्रत्यय विषय पर सटीक, प्रत्यक्ष CG-विशिष्ट प्रश्न-पाठ की पुष्टि नहीं हो सकी, पर आधिकारिक सिलेबस दस्तावेज़ इस विषय के परीक्षा-योग्य होने की पुष्टि करता है। किसी भी कोचिंग सामग्री के विशिष्ट वर्ष/प्रश्न के दावे को भरोसा करने से पहले आधिकारिक उत्तर कुंजी से जांचें।

स्वयं जांचें

  1. क्या आप प्रत्यय की परिभाषा अपने शब्दों में बता सकते हैं?
  2. क्या आप कृत् व तद्धित प्रत्यय के बीच का मूल अंतर बता सकते हैं?
  3. क्या आप "समझ" शब्द से तीन नए शब्द (प्रत्यय जोड़कर) बना सकते हैं?
  4. क्या आप दो और भाववाचक संज्ञा (ता/पन/ई प्रत्यय से) बना सकते हैं?
  5. क्या आप छत्तीसगढ़ के किसी और तद्धित-प्रत्यय-निर्मित पेशा-वाचक शब्द का उदाहरण दे सकते हैं?
  6. क्या आप उपसर्ग व प्रत्यय के बीच का दिशा-भेद समझा सकते हैं?
Sahayak ShikshakHindiCTET

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

'पढ़ाई' शब्द में मूल क्रिया व प्रत्यय क्या हैं?

'लोहार' शब्द में जुड़ा प्रत्यय कृत् है या तद्धित?

कृत् व तद्धित प्रत्यय में मुख्य अंतर क्या है?

'मीठा' शब्द से भाववाचक संज्ञा बनाएं।

'खिलाड़ी' शब्द किस क्रिया से व किस प्रत्यय से बना है?

'बच्चा' शब्द से भाववाचक संज्ञा 'बचपन' किस प्रत्यय से बनी है?

'कुम्हार' शब्द किस पारंपरिक पेशे को इंगित करता है?

'मनुष्यता' शब्द किस प्रत्यय से बना है?

यह मान लेना कि हर अंत-प्रत्यय कृत् होता है, गलत क्यों है?

🧭 इस लेख में
📌 मुख्य बिंदु
●
प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाने वाले शब्दांश हैं।
●
प्रत्यय के दो भेद हैं: कृत् (क्रिया से) व तद्धित (संज्ञा/विशेषण से)।
●
कृत् प्रत्यय उदाहरण: पढ़+आई=पढ़ाई, खेल+आड़ी=खिलाड़ी।
●
तद्धित प्रत्यय उदाहरण: लोहा+आर=लोहार, समझ+दार=समझदार, बच्चा+पन=बचपन।
●
प्रत्यय शब्द के अंत में, उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है — दोनों में मुख्य भेद यही है।
●
प्रत्यय क्रिया को संज्ञा में बदल सकते हैं (व्याकरणिक भेद-परिवर्तन)।
●
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पेशा-वाचक शब्दावली (लोहार, सुनार, कुम्हार) तद्धित प्रत्यय का स्थानीय उदाहरण है।
●
मूल सिद्धांत सार्वभौमिक है, कोई अलग CG-विशिष्ट व्याकरण-नियम नहीं।
अभ्यास क्विज़
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