मौलिक कर्तव्य क्या हैं?
मौलिक कर्तव्य राष्ट्र के प्रति हर नागरिक के नैतिक दायित्व हैं, जो अनुच्छेद 51A में सूचीबद्ध हैं। मौलिक अधिकारों के विपरीत ये न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी जिम्मेदार नागरिकता के लिए महत्वपूर्ण हैं व CG TET/CGPSC में बार-बार पूछे जाते हैं।
परिचय
मौलिक कर्तव्य राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के नैतिक दायित्व हैं। मौलिक अधिकारों के विपरीत, ये न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन एक जिम्मेदार, जागरूक नागरिकता बनाने हेतु समान रूप से महत्वपूर्ण हैं — व सहायक शिक्षक परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
पृष्ठभूमि
- मौलिक कर्तव्य मूल संविधान (1950) का हिस्सा नहीं थे।
- इन्हें 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा, स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर, (तत्कालीन) यूएसएसआर संविधान के अनुच्छेद 61 से प्रेरित होकर जोड़ा गया।
- ये संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
- मूलतः 10 कर्तव्य जोड़े गए थे; 11वां कर्तव्य बाद में 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
11 मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) — भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह:
- संविधान का पालन करे व उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज व राष्ट्रगान का आदर करे।
- स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उदात्त आदर्शों को हृदय में संजोए व उनका पालन करे।
- भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता की रक्षा करे व उसे अक्षुण्ण रखे।
- देश की रक्षा करे व आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
- धार्मिक, भाषायी व प्रादेशिक विविधताओं से परे जाकर भारत के सभी लोगों में समरसता व समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे; स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे।
- देश की सामासिक संस्कृति की समृद्ध विरासत का महत्व समझे व उसका परिरक्षण करे।
- वनों, झीलों, नदियों व वन्य जीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे व उसका संवर्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करे व हिंसा से दूर रहे।
- व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे।
- (86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया) माता-पिता या संरक्षक अपने बच्चे/प्रतिपाल्य को 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
प्रमुख विशेषताएं
- मौलिक कर्तव्य केवल नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशियों पर नहीं (कुछ मौलिक अधिकारों के विपरीत)।
- ये गैर-न्यायोचित हैं — इनके उल्लंघन हेतु किसी नागरिक को सीधे दंडित नहीं किया जा सकता, हालांकि संसद इन्हें लागू करने हेतु कानून बना सकती है।
- कर्तव्य 11 सीधे शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21A) से जुड़ा है, जो उसी 86वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
एक शिक्षक के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
कर्तव्य 11 शिक्षक के पेशे हेतु विशेष रूप से प्रासंगिक है — यह 6-14 वर्ष की आयु के बच्चे की शिक्षा हेतु माता-पिता/संरक्षक पर जिम्मेदारी डालता है, जो ठीक वही आयु समूह है जिसके साथ अधिकांश सहायक शिक्षक कार्य करते हैं। सभी 11 कर्तव्यों को समझना छात्रों के समक्ष जिम्मेदार नागरिकता का उदाहरण प्रस्तुत करने में भी मदद करता है।
संक्षिप्त पुनरावलोकन
- 42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़े गए (स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश); यूएसएसआर संविधान से प्रेरित।
- अनुच्छेद 51A, भाग IVA के अंतर्गत सूचीबद्ध।
- मूलतः 10 कर्तव्य; 11वां 86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
- कर्तव्य 11: माता-पिता/संरक्षक को 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।
- मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायोचित हैं (न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं) व केवल नागरिकों पर लागू होते हैं।