गणित में अमूर्तिकरण क्या है?
पिछले लेख ने 'अमूर्तिकरण को संभालना' को गणितीय सोच के कई घटकों में से केवल एक के रूप में सूचीबद्ध किया था। यह लेख उस एक घटक पर गहराई से जाता है — ठोस वस्तुओं से प्रतीकों तक की यात्रा, पियाजे व ब्रूनर के ढांचों सहित, CG TET/CGPSC का टॉपिक।
परिचय
पिछले लेख ने "अमूर्तिकरण को संभालना" को गणितीय सोच के कई घटकों में से केवल एक के रूप में सूचीबद्ध किया था। यह लेख उस एक घटक पर गहराई से जाता है, क्योंकि पाठ्यक्रम इसे अपनी एक समर्पित इकाई देता है — यह इस बात का संकेत है कि यह कितना केंद्रीय है। एक शुरुआती की सामान्य उलझन यह सोचना है कि "अमूर्तिकरण" बिना किसी ठोस शिक्षण अर्थ वाला एक अस्पष्ट दार्शनिक शब्द है। यह इसके विपरीत है: अमूर्तिकरण संपूर्ण गणित शिक्षा में सबसे सटीक रूप से वर्णन-योग्य, सबसे व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है, जिसके चारों ओर नामित मनोवैज्ञानिक ढांचे व विशिष्ट कक्षा-तकनीकें बनी हैं।
सबसे सरल शब्दों में: अमूर्तिकरण एक अनुभव से विशिष्ट, ठोस विवरण हटाकर एक सामान्य विचार तक पहुंचने की मानसिक प्रक्रिया है जिसे कहीं भी लागू किया जा सकता है। जब एक बच्चा "3 आम प्लस 2 आम" से केवल "3 + 2" की ओर बढ़ता है, तो उसने अमूर्तिकरण का एक कार्य किया है — संख्याओं को अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वस्तुएं आम थीं, पेंसिल थीं, या कुछ भी और। गणित में बच्चों को होने वाली लगभग हर कठिनाई, विशेष रूप से बीजगणित में छलांग, इस बात से जुड़ती है कि यह प्रक्रिया कितनी अच्छी या खराब तरीके से बनाई गई थी।
विस्तृत व्याख्या
आधारभूत बातें: अमूर्तिकरण मनोवैज्ञानिक रूप से कहां से आता है
- जीन पियाजे (1896–1980), स्विस विकासात्मक मनोवैज्ञानिक जिनका चरण सिद्धांत अधिकांश भारतीय शिक्षक-प्रशिक्षण शिक्षाशास्त्र का आधार है, ने दो प्रकार के अमूर्तिकरण को अलग किया:
- अनुभवजन्य अमूर्तिकरण (Empirical abstraction): इंद्रियों के माध्यम से भौतिक वस्तुओं से सीधे एक गुण निकालना — जैसे, यह देखना कि एक गेंद, एक संतरा, व एक ग्लोब सभी "गोल" हैं।
- चिंतनशील अमूर्तिकरण (Reflective abstraction): एक नया विचार वस्तुओं से नहीं बल्कि वस्तुओं पर की गई क्रियाओं से, या पहले से बने मानसिक संक्रियाओं से निकालना — जैसे, यह महसूस करना कि "गिनती" हमेशा समान कुल देती है चाहे वस्तुओं को किसी भी क्रम में गिना जाए (यह अंतर्दृष्टि गिनती की क्रिया पर चिंतन से आती है, किसी एक वस्तु के भौतिक गुण से नहीं)। चिंतनशील अमूर्तिकरण को दोनों में से अधिक गहरा, अधिक गणितीय रूप से शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि अधिकांश उच्च गणित (बीजगणित, उपपत्ति, संरचना) इसी तरह बनाया गया है।
- NCF 2005 गणित शिक्षण पर स्थिति पत्र सीधे कहता है कि गणित को धीरे-धीरे अमूर्तिकरण की ओर बढ़ने की आवश्यकता है, भले ही यह ठोस अनुभवों व मॉडलों से शुरू होता है — अमूर्तिकरण को एक क्रमिक विकासात्मक यात्रा के रूप में माना जाता है, न कि स्कूल के पहले दिन चालू किए गए एक स्विच के रूप में।
ठोस–सचित्र–अमूर्त (Concrete–Pictorial–Abstract, CPA) दृष्टिकोण
अमूर्तिकरण को सुरक्षित रूप से बनाने की मानक कक्षा विधि एक तीन-चरण प्रगति है, जो सबसे निकटता से मनोवैज्ञानिक जेरोम ब्रूनर (1915–2016) के निरूपण के तीन तरीकों से जुड़ी है — सक्रिय (enactive) (क्रिया/भौतिक वस्तुओं के माध्यम से), प्रतिमा-आधारित (iconic) (चित्रों/छवियों के माध्यम से), व प्रतीकात्मक (symbolic) (अमूर्त प्रतीकों/भाषा के माध्यम से) — जिसे भारतीय शिक्षक-प्रशिक्षण सामग्री में सामान्यतः इस तरह सरल बनाया जाता है:
| चरण | क्या होता है | उदाहरण ("3 + 2" पढ़ाना) |
|---|---|---|
| ठोस (सक्रिय) | बच्चा वास्तविक वस्तुओं को भौतिक रूप से संभालता है | बच्चा 3 वास्तविक पत्थर हिलाता है, फिर 2 और वास्तविक पत्थर, व कुल गिनता है |
| सचित्र (प्रतिमा-आधारित) | बच्चा वस्तुओं को दर्शाने वाले चित्रों/आरेखों के साथ काम करता है | बच्चा 3 वृत्त बनाता है, फिर 2 और वृत्त, व चित्र गिनता है |
| अमूर्त (प्रतीकात्मक) | बच्चा केवल संख्याओं व प्रतीकों के साथ काम करता है | बच्चा बिना किसी भौतिक या खींची गई वस्तु के "3 + 2 = 5" लिखता व हल करता है |
शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता: इस ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण एकल नियम यह है कि एक शिक्षक को कभी भी एक चरण नहीं छोड़ना चाहिए, व एक संघर्षरत बच्चे को केवल वही अमूर्त व्याख्या धीमी या ज़ोर से दोहराने के बजाय हमेशा एक चरण पीछे (अमूर्त से सचित्र, या सचित्र से ठोस) ले जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
गणित की शाखाओं में अमूर्तिकरण के स्तर व उदाहरण
- संख्या अमूर्तिकरण: "3 आम + 2 आम = 5 आम" "3 + 2 = 5" में अमूर्त हो जाता है, एक तथ्य जो 2 वस्तुओं के किसी भी समूह से जुड़े 3 वस्तुओं के किसी भी समूह पर लागू होता है, चाहे वस्तुएं कुछ भी हों।
- चर अमूर्तिकरण (बीजगणित): "कुछ अज्ञात राशि जिसे मैं खोजने की कोशिश कर रहा हूं" प्रतीक x में अमूर्त हो जाती है — स्कूली गणित में सबसे बड़ी अमूर्तिकरण छलांग, क्योंकि x का कोई निश्चित मूल्य नहीं है व यह किसी विशिष्ट संख्या को संदर्भित करने के बजाय नियमों के अनुसार व्यवहार करता है।
- आकृति अमूर्तिकरण (ज्यामिति): एक वास्तविक गेंद, संतरा, या ग्लोब — सभी थोड़े अपूर्ण, सभी किसी सामग्री से बने, सभी में कुछ मोटाई — एक पूर्ण गोले (sphere) के विचार में अमूर्त हो जाते हैं: एक केंद्र से ठीक, समान दूरी पर बिंदुओं का एक समूह, शून्य मोटाई के साथ व बिल्कुल किसी सामग्री के बिना। कोई भौतिक गोला कभी वास्तव में अस्तित्व में नहीं रहा है; यह एक शुद्ध अमूर्तिकरण है।
- संक्रिया अमूर्तिकरण: दोहराया गया जोड़ (2+2+2+2+2) एक नई, अलग संक्रिया, गुणा (2 × 5) में अमूर्त हो जाता है — एक निम्न-क्रम से बनी एक उच्च-क्रम की अमूर्तता।
- संरचनात्मक अमूर्तिकरण: यह नोट करना कि पूर्ण संख्याओं का जोड़ व भिन्नों का जोड़ "एक ही तरह से व्यवहार करते हैं" (दोनों क्रमविनिमेय हैं: a+b = b+a) एक और अमूर्तिकरण है — एक संक्रिया का एक गुण अमूर्त करना, यह इस बात से स्वतंत्र है कि संक्रिया किन संख्याओं पर लागू होती है।
बच्चों के लिए अमूर्तिकरण वास्तव में कठिन क्यों है
- कार्यशील स्मृति भार: बिना किसी भौतिक आधार के मन में एक प्रतीक का अर्थ रखना आपके सामने रखी एक वास्तविक वस्तु के साथ सीधे काम करने की तुलना में अधिक मानसिक प्रयास लेता है।
- समय-पूर्व प्रतीक परिचय: एक बहुत सामान्य कक्षा त्रुटि यह है कि एक बच्चे को अंतर्निहित विचार के साथ पर्याप्त ठोस व सचित्र अनुभव होने से पहले ही अमूर्त प्रतीक (जैसे, "x") पेश कर दिया जाता है।
- पियाजे की विकासात्मक तत्परता: पियाजे का चरण सिद्धांत (बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र विषय में विस्तार से कवर किया गया) सुझाव देता है कि मूर्त संक्रियात्मक चरण (लगभग 7–11 वर्ष) में बच्चे तार्किक रूप से तर्क करते हैं लेकिन उन्हें ठोस संदर्भ चाहिए होते हैं, जबकि अधिक लचीला, काल्पनिक अमूर्तिकरण केवल औपचारिक संक्रियात्मक चरण (लगभग 11+ वर्ष) में ही विश्वसनीय रूप से उपलब्ध होता है — यही ठीक कारण है कि बीजगणित सामान्यतः उच्च-प्राथमिक/मध्य विद्यालय से शुरू किया जाता है, पहले नहीं।
- भाषा की अस्पष्टता: रोज़मर्रा के भाषण में ढीले ढंग से उपयोग किए गए शब्द (जैसे, "और," "का," "अंतर") गणित में सटीक अमूर्त अर्थ रखते हैं जिन्हें एक बच्चे को आकस्मिक उपयोग से अलग करना सीखना होता है।
ये विचार आपस में कैसे जुड़ते हैं — CPA दृष्टिकोण के माध्यम से स्थानीय मान पढ़ाना
- ठोस: एक शिक्षक एक बच्चे को ढीली गिनती की छड़ियां/मनके व दस के बंडल देता है। बच्चा दस ढीली छड़ियों को भौतिक रूप से एक बंडल में बांधता है, सीधे क्रिया के माध्यम से "दस इकाई एक दहाई बन जाते हैं" का अनुभव करते हुए।
- सचित्र: शिक्षक चित्रों की ओर बढ़ता है — बंधे हुए छड़ियों व ढीली छड़ियों का एक चित्र, या "दहाई" व "इकाई" स्तंभों वाला एक सरल स्थानीय-मान चार्ट, जहां बच्चा भौतिक बंडलों को संभालने के बजाय स्तंभों में गिनतियां खींचता या रखता है।
- अमूर्त: शिक्षक अंततः विशुद्ध प्रतीकात्मक रूप पेश करता है: संख्या "23," जहां अंक "2" अमूर्त रूप से दस-के-2 बंडलों को दर्शाता है (बिना किसी बंडल के वास्तव में खींचे या मौजूद हुए) व "3" 3 ढीली इकाइयों को दर्शाता है।
- चिंतनशील अमूर्तिकरण, ऊपर परतदार: बाद में, बच्चा जोड़/घटाव में उधार लेने व ले जाने को समझने के लिए पुनर्समूहन की क्रिया पर ही चिंतन करता है (अब छड़ियों पर नहीं) — पहले की अमूर्तता पर चिंतन से बनी एक नई अमूर्तता, यह दर्शाते हुए कि पियाजे इस प्रक्रिया को चिंतनशील क्यों कहते हैं।
यह चार-चरण की चाप — ठोस, सचित्र, अमूर्त, फिर अमूर्तता पर ही चिंतनशील अमूर्तिकरण — इस पूरी इकाई का मूल परस्पर-संबंध है जिसकी समझ परखी जा रही है।
परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
अमूर्तिकरण को भारी रूप से परखा जाता है क्योंकि यह वह एकल सबसे सामान्य बिंदु है जहां बच्चे गणित में "अटक" जाते हैं, विशेष रूप से अंकगणित-से-बीजगणित संक्रमण पर — इसे इस पूरे पाठ्यक्रम में सबसे अधिक कक्षा-व्यावहारिक इकाइयों में से एक बनाते हुए, केवल सिद्धांत नहीं। परीक्षक भी इस विषय को पसंद करते हैं क्योंकि CPA ढांचा उन्हें क्रम-निर्धारण व परिदृश्य-पहचान प्रश्न बनाने के लिए एक स्वच्छ तीन-चरण अनुक्रम देता है।
स्मृति सहायक
याद रखें "C-P-A: Can't Push Ahead" (सी-पी-ए: आगे नहीं बढ़ा सकते) — एक अनुस्मारक कि एक शिक्षक को कभी भी बीच में सचित्र सेतु के बिना एक बच्चे को ठोस से सीधे अमूर्त की ओर नहीं धकेलना चाहिए; यदि कोई बच्चा अमूर्त चरण पर अटक गया है, तो "आगे नहीं बढ़ सकते" — पहले सचित्र या ठोस की ओर वापस जाएं।
छत्तीसगढ़ पक्ष
अमूर्तिकरण स्वयं, एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में, सार्वभौमिक है व इसमें कोई क्षेत्रीय भिन्नता नहीं है — यह लेख जबरन एक नहीं जोड़ेगा। फिर भी, CG के संदर्भ के लिए एक वास्तविक, व्यावहारिक रूप से प्रासंगिक बिंदु: संसाधन-सीमित ग्रामीण छत्तीसगढ़ कक्षाओं में CPA दृष्टिकोण के ठोस चरण को सामान्यतः स्टोर से खरीदी गई मैनिपुलेटिव किट के बजाय स्वतंत्र रूप से उपलब्ध स्थानीय सामग्री — इमली के बीज, कंकड़, टहनियां, या बीज — का उपयोग करके बनाया जाता है। यह एक जबरन सांस्कृतिक संदर्भ नहीं बल्कि एक वास्तविक, व्यावहारिक शिक्षण अनुकूलन है जो कई CG सरकारी-स्कूल कक्षाओं के लिए प्रासंगिक है, विशेष रूप से "शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता" पक्ष के लिए जानने योग्य।
उदाहरण
- अमूर्तिकरण के प्रकार को पहचानें: एक बच्चा एक गेंद, एक संतरा, व एक ग्लोब को सीधे देखकर व छूकर सभी को "गोल" नोट करता है। यह किस प्रकार का अमूर्तिकरण है? → अनुभवजन्य अमूर्तिकरण (इंद्रियों के माध्यम से भौतिक वस्तुओं से सीधे निकाला गया गुण)।
- अमूर्तिकरण के प्रकार को पहचानें: एक बच्चा यह महसूस करता है कि 5 वस्तुओं के एक समूह को गिनने पर "5" मिलता है चाहे किसी भी क्रम में गिना जाए — गिनती की क्रिया पर ही चिंतन से निकली एक अंतर्दृष्टि। → चिंतनशील अमूर्तिकरण।
- CPA चरण लागू करें: एक शिक्षक "5 − 2 = 3" पढ़ाना चाहता है। तीनों CPA चरणों में से प्रत्येक के लिए एक गतिविधि का वर्णन करें। → ठोस: 5 वास्तविक गिनतियों में से 2 भौतिक रूप से हटाएं व बचे हुए गिनें। सचित्र: 5 वृत्त बनाएं, 2 काटें, बचे हुए वृत्त गिनें। अमूर्त: केवल अंकों का उपयोग करते हुए "5 − 2 = 3" हल करें।
- अमूर्तिकरण छलांग पहचानें: जब एक शब्द समस्या की "खोजी जाने वाली अज्ञात राशि" को प्रतीक x से बदल दिया जाता है, तो क्या अमूर्त किया जा रहा है? → चर अमूर्तिकरण — एक विशिष्ट-लेकिन-अज्ञात संख्या को एक सामान्य प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है जो नियमों द्वारा शासित है, किसी एक मूल्य से बंधा नहीं।
- एक शिक्षण निर्णय का मूल्यांकन करें: एक शिक्षक एक ऐसी कक्षा में बीजगणितीय समीकरण पेश करता है जिसने अंतर्निहित अंकगणितीय विचारों के लिए कभी ठोस मैनिपुलेटिव या चित्रों का उपयोग नहीं किया। CPA ढांचे के अनुसार इसका मूल्यांकन करें। → समय-पूर्व — यह ठोस व सचित्र दोनों चरणों को छोड़ देता है, बीजगणित चिंता व भ्रम का एक सामान्य व अच्छी तरह से दस्तावेज़ीकृत कारण।
- ज्यामितीय अमूर्तिकरण: समझाएं कि "शून्य मोटाई व पूर्ण गोलाई वाला एक गोला" किसी वास्तविक वस्तु का वर्णन होने के बजाय एक शुद्ध अमूर्तिकरण क्यों है। → कोई भौतिक वस्तु कभी पूर्ण रूप से गोल नहीं होती या शून्य मोटाई की नहीं होती; गणितीय गोला कई अपूर्ण वास्तविक गोल वस्तुओं से अमूर्त की गई एक आदर्शीकृत अवधारणा है।
- संक्रिया-स्तर अमूर्तिकरण: समझाएं कि गुणा जोड़ के ऊपर बनी एक अमूर्तता कैसे है। → गुणा (2 × 5) जोड़ के दोहराए गए पैटर्न (2+2+2+2+2) को एक नई, उच्च-क्रम की संक्रिया में अमूर्त करता है, बजाय इसके कि हर बार दोहराए गए जोड़ को लिखने की आवश्यकता हो।
- एक अटके हुए सीखने वाले का निदान करें: एक कक्षा 7 का छात्र संतुलन-तराजू चित्र के साथ दिखाए जाने पर "x + 3 = 7" हल कर सकता है लेकिन केवल प्रतीकात्मक समीकरण दिखाए जाने पर असफल हो जाता है। यह क्या सुझाव देता है, व शिक्षक को क्या करना चाहिए? → बच्चे ने अभी तक इस अवधारणा के लिए सचित्र-से-अमूर्त संक्रमण को मज़बूत नहीं किया है; शिक्षक को केवल अमूर्त रूप को दोहराने के बजाय सचित्र निरूपणों के साथ पुल बनाना जारी रखना चाहिए।
- संरचनात्मक अमूर्तिकरण: एक छात्र नोट करता है "3 + 5 = 5 + 3" व अलग से "2 + 7 = 7 + 2," व सामान्यीकरण करता है "किन्हीं भी दो संख्याओं के लिए, a + b = b + a." यहां क्या अमूर्त किया जा रहा है? → जोड़ संक्रिया का एक संरचनात्मक गुण (क्रमविनिमेयता), इससे स्वतंत्र कि कौन-सी विशिष्ट संख्याएं शामिल हैं — किसी भी एकल संख्यात्मक तथ्य से आगे की, उच्चतर अमूर्तता का स्तर।
- पियाजे के चरण से जोड़ें: पियाजे के चरण सिद्धांत का उपयोग करते हुए समझाएं कि बीजगणित सामान्यतः उच्च-प्राथमिक/मध्य विद्यालय से पहले क्यों नहीं पेश किया जाता। → लचीला, काल्पनिक अमूर्त तर्क (चरों व सामान्य नियमों के लिए आवश्यक) केवल औपचारिक संक्रियात्मक चरण (लगभग 11+ वर्ष) से ही विश्वसनीय रूप से उपलब्ध होता है; मूर्त संक्रियात्मक चरण में छोटे बच्चे तार्किक रूप से तर्क करते हैं लेकिन उन्हें अभी भी ठोस संदर्भ चाहिए होते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य / तालिका
| अवधारणा | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| अनुभवजन्य अमूर्तिकरण (पियाजे) | इंद्रियों के माध्यम से भौतिक वस्तुओं से सीधे निकाला गया गुण |
| चिंतनशील अमूर्तिकरण (पियाजे) | क्रियाओं/मानसिक संक्रियाओं से निकाला गया नया विचार, सीधे वस्तुओं से नहीं — गणितीय रूप से गहरा |
| CPA चरण (ब्रूनर: सक्रिय-प्रतिमा-आधारित-प्रतीकात्मक) | ठोस → सचित्र → अमूर्त |
| स्कूली गणित में सबसे बड़ी एकल अमूर्तिकरण छलांग | चर (बीजगणित) — एक अज्ञात, सामान्य राशि एक प्रतीक द्वारा दर्शाई गई |
| पियाजे का लचीले अमूर्तिकरण हेतु तत्परता चरण | औपचारिक संक्रियात्मक चरण, लगभग 11+ वर्ष |
| NCF 2005 का रुख | अमूर्तिकरण को क्रमिक रूप से बनाया जाना चाहिए, ठोस अनुभव से शुरू करते हुए, अचानक पेश नहीं किया जाना चाहिए |
ढांचागत टिप्पणी — ब्रूनर की मूल शब्दावली बनाम सामान्य भारतीय कक्षा शब्दावली (दोनों एक ही तीन-चरण विचार को संदर्भित करते हैं; परीक्षा में कोई भी दिखाई दे सकता है):
| ब्रूनर का मूल शब्द | सामान्य कक्षा शब्द |
|---|---|
| सक्रिय (Enactive) | ठोस (Concrete) |
| प्रतिमा-आधारित (Iconic) | सचित्र (Pictorial) |
| प्रतीकात्मक (Symbolic) | अमूर्त (Abstract) |
सामान्य भ्रांतियां
- "अमूर्तिकरण" को बिना किसी व्यावहारिक कक्षा अर्थ के अस्पष्ट दर्शन मानना। जैसा ऊपर दिखाया गया, यह गणित शिक्षाशास्त्र में सबसे ठोस, तकनीक-समृद्ध विषयों में से एक है।
- अनुभवजन्य व चिंतनशील अमूर्तिकरण को गड्डमड्ड करना। अनुभवजन्य अमूर्तिकरण वस्तुओं के एक भौतिक गुण से आता है; चिंतनशील अमूर्तिकरण क्रियाओं/संक्रियाओं पर चिंतन से आता है — एक सूक्ष्म लेकिन बार-बार परखा जाने वाला भेद।
- सचित्र चरण को पूरी तरह छोड़ते हुए, ठोस → अमूर्त पर कूदना। यह CPA ढांचे की सबसे सामान्य कक्षा कार्यान्वयन त्रुटि है।
- यह मान लेना कि CPA अनुक्रम एक बार की यात्रा है, हर विषय के लिए हमेशा के लिए एक बार पूरी की जाने वाली। व्यवहार में, एक शिक्षक आवश्यकतानुसार बच्चे को चरणों में आगे-पीछे ले जाता है, यहां तक कि यदि भ्रम फिर से उभरता है तो पहले अमूर्त स्तर पर पहुंचे किसी विषय के लिए भी ठोस सामग्री की ओर वापस लौटता है।
- यह मान लेना कि अमूर्तिकरण तत्परता विशुद्ध रूप से उम्र के बारे में है, शिक्षण समर्थन के लिए कोई गुंजाइश नहीं। जबकि पियाजे के चरण मोटा मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया ठोस/सचित्र मचान अकेले उम्र से अनुमानित होने से पहले अमूर्त विचारों के साथ जुड़ाव का समर्थन कर सकता है।
- पियाजे के चरण नामों को गड्डमड्ड करना। "मूर्त संक्रियात्मक" (लगभग 7–11) CPA के "ठोस" चरण (एक शिक्षण तकनीक) के समान नहीं है — पहला एक विकासात्मक चरण है, दूसरा एक अनुदेशात्मक विधि है; उम्मीदवार कभी-कभी गलत तरीके से दोनों शब्दावलियों को मिला देते हैं।
- यह मान लेना कि सभी बच्चे CPA चरणों से एक ही गति से गुजरते हैं। व्यक्तिगत भिन्नता महत्वपूर्ण है; यह ढांचा निर्देश को क्रमबद्ध करने के लिए एक मार्गदर्शक है, हर सीखने वाले के लिए एक निश्चित समय-सारणी नहीं।
- यह मानना कि स्कूल में पढ़ाई गई ज्यामितीय आकृतियां (वृत्त, गोला, रेखा) वास्तविक वस्तुओं का शाब्दिक वर्णन हैं। ये अमूर्तताएं/आदर्शीकरण हैं — कोई वास्तविक वस्तु एक पूर्ण वृत्त नहीं है या शून्य-चौड़ाई वाली रेखाएं नहीं रखती।
पूर्व वर्ष के प्रश्न पैटर्न
वर्तमान पाठ्यक्रम चक्र के लिए इस सटीक उप-विषय के लिए कोई सत्यापन-योग्य, उद्धृत करने योग्य CG सहायक शिक्षक/CGPSC/CG व्यापम पिछले वर्ष का प्रश्न पुष्टि नहीं किया जा सका, इसलिए — बताए गए फॉलबैक नियम के अनुसार — यह खंड अच्छी तरह से दस्तावेज़ीकृत CTET/REET राष्ट्रीय पैटर्न पर निर्भर करता है, जहां CPA ढांचा व पियाजे की अमूर्तिकरण अवधारणाएं गणित-शिक्षाशास्त्र खंड में बार-बार परखी जाती हैं:
- क्रम-निर्धारण पैटर्न: उम्मीदवारों से CPA (या सक्रिय-प्रतिमा-आधारित-प्रतीकात्मक) चरणों का सही क्रम पहचानने, या एक वर्णित कक्षा गतिविधि को सही चरण से मिलाने के लिए कहने वाले प्रश्न — इस विषय के लिए एक बहुत सामान्य REET/CTET प्रश्न प्रारूप, पिछले लेख के पोल्या-चरण क्रम-निर्धारण पैटर्न के समानांतर।
- परिदृश्य-निदान पैटर्न: एक संक्षिप्त कक्षा परिदृश्य दिया जाता है (जैसे, "एक शिक्षक बिना पूर्व ठोस कार्य के सीधे x पेश करता है") व उम्मीदवारों को यह पहचानना होता है कि किस शैक्षणिक सिद्धांत का उल्लंघन किया गया — यह क्रमिक अमूर्तिकरण की लागू समझ को परखता है, केवल परिभाषा स्मरण नहीं।
- शब्दावली-मिलान पैटर्न: ब्रूनर की मूल शब्दावली (सक्रिय, प्रतिमा-आधारित, प्रतीकात्मक) को उनके सामान्य कक्षा समकक्षों (ठोस, सचित्र, अमूर्त) से मिलाना — यह परखते हुए कि क्या एक उम्मीदवार एक ही अंतर्निहित ढांचे के लिए दोनों शब्दावलियों को पहचानता है।
स्रोत के बारे में ईमानदार टिप्पणी: लेखन के समय इस सटीक उप-विषय के लिए किसी CG-विशिष्ट पिछले वर्ष के उद्धरण की पुष्टि नहीं हो सकी; भरोसा करने से पहले किसी तृतीय-पक्ष कोचिंग सामग्री के दावे को आधिकारिक CG व्यापम उत्तर कुंजी के विरुद्ध जांचें।
स्वयं जांचें
- क्या आप अपने शब्दों में अनुभवजन्य व चिंतनशील अमूर्तिकरण के बीच अंतर समझा सकते हैं, प्रत्येक के एक उदाहरण के साथ?
- क्या आप CPA दृष्टिकोण के तीन चरणों का वर्णन कर सकते हैं व अपनी पसंद के किसी विषय के लिए प्रत्येक के लिए एक ठोस कक्षा गतिविधि दे सकते हैं?
- एक शिक्षक को बच्चे को CPA चरणों में पीछे ले जाने के लिए तैयार क्यों रहना चाहिए, इसे एक-तरफ़ा प्रगति मानने के बजाय?
- क्या आप पियाजे के चरण सिद्धांत का उपयोग करते हुए समझा सकते हैं कि बीजगणित (चर अमूर्तिकरण) सामान्यतः केवल उच्च-प्राथमिक/मध्य विद्यालय से ही क्यों पेश किया जाता है?
- क्या आप समझा सकते हैं कि "पूर्ण वृत्त" जैसी एक ज्यामितीय आकृति को किसी वास्तविक वस्तु के वर्णन के बजाय एक अमूर्तिकरण क्यों कहा जाता है?
- क्या आप ब्रूनर की मूल शब्दावली (सक्रिय, प्रतिमा-आधारित, प्रतीकात्मक) को उनके सामान्य कक्षा समकक्षों (ठोस, सचित्र, अमूर्त) से मिला सकते हैं?