कक्षा में रचनावाद क्या है?
इस 'गणित सीखना व आकलन' इकाई में हर लेख ने बिना नाम लिए एक ही दर्शन का संकेत दिया है: बच्चे विशिष्टिकरण-व्यापकीकरण से अपना सूत्र बनाते हैं। पियाजे व वायगोत्स्की के रचनावाद सिद्धांत CG TET/CGPSC में नियमित पूछे जाते हैं।
परिचय
इस "गणित सीखना व आकलन" इकाई में अब तक हर लेख ने बिना सीधे नाम लिए एक ही अंतर्निहित दर्शन का संकेत दिया है: बच्चे विशिष्टिकरण-व्यापकीकरण के माध्यम से अपना खुद का सूत्र बनाते हैं, ठोस-सचित्र-अमूर्त चरणों के माध्यम से स्थानीय मान की खोज करते हैं, केवल याद रखने के बजाय यह समझते हैं कि एक वैदिक गणित शॉर्टकट क्यों काम करता है। यह लेख उस दर्शन को सीधे नाम देता है: रचनावाद (Constructivism) — वह प्रमुख सीखने का सिद्धांत जिसके पीछे NCF 2005 आज भारतीय कक्षाओं में गणित को कैसे पढ़ाना चाहता है। एक शुरुआती की सामान्य उलझन "रचनावाद" को परीक्षा के लिए याद रखने वाला एक और अमूर्त सिद्धांत-शब्द मानना है, जो किसी भी व्यावहारिक चीज़ से डिस्कनेक्ट है। वास्तव में, यह वही एकल सिद्धांत है जो यह समझाता है कि इस श्रृंखला के पिछले लेखों में उल्लिखित लगभग हर "अच्छा अभ्यास" (CPA दृष्टिकोण, उदाहरणों-से-व्यापकीकरण, शॉर्टकट-से-पहले-समझें) आखिर क्यों अच्छा अभ्यास माना जाता है।
एक वाक्य में: रचनावाद मानता है कि सीखने वाले सक्रिय रूप से नए अनुभवों को जो वे पहले से जानते हैं उससे जोड़कर अपनी खुद की समझ बनाते हैं, बजाय इसके कि वे एक शिक्षक से तैयार ज्ञान निष्क्रिय रूप से प्राप्त करें।
विस्तृत व्याख्या
आधारभूत बातें: रचनावाद बनाम पुराना व्यवहारवादी दृष्टिकोण
- रचनावाद के भारतीय पाठ्यचर्या नीति में प्रमुख बनने से पहले, कक्षा गणित को भारी रूप से व्यवहारवाद (Behaviourism) द्वारा आकार दिया गया था — एक सीखने का सिद्धांत (बी.एफ. स्किनर जैसे मनोवैज्ञानिकों से जुड़ा) जो सीखने को अभ्यास, दोहराव, व पुनर्बलन (सही उत्तरों को पुरस्कृत करना, गलत को सही करना या अनदेखा करना) के माध्यम से उत्पन्न अवलोकन-योग्य व्यवहार में एक परिवर्तन के रूप में मानता है, जिसमें सीखने वाले की आंतरिक समझ पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है।
- रचनावाद, इसके विपरीत, सीखने वाले के मन को अपनी खुद की ज्ञान संरचनाओं का सक्रिय रूप से निर्माण ("रचना") करने के रूप में मानता है, नई जानकारी को पूर्व समझ से जोड़कर — बाहर से तथ्यों व प्रक्रियाओं से भरे जाने वाले एक निष्क्रिय पात्र के रूप में नहीं।
- NCF 2005 गणित पढ़ाने के लिए स्पष्ट रूप से एक रचनावादी दृष्टिकोण का समर्थन करता है, बच्चे को एक सक्रिय अर्थ-निर्माता के रूप में मानते हुए, न कि एक निष्क्रिय प्राप्तकर्ता के रूप में — यह इस "गणित की प्रकृति/गणित सीखना" समूह के बिल्कुल पहले लेख में कवर किए गए "मैथमेटाइजेशन" लक्ष्य के पीछे वही दार्शनिक आधार है।
रचनावाद की दो प्रमुख धाराएं
- संज्ञानात्मक (पियाजेवादी) रचनावाद — जीन पियाजे (1896–1980): इस पर केंद्रित है कि एक व्यक्तिगत बच्चे का मन दो पूरक प्रक्रियाओं के माध्यम से ज्ञान कैसे बनाता है: आत्मसात्करण (assimilation) (नई जानकारी को एक मौजूदा मानसिक संरचना, या "स्कीमा," में फिट करना) व समंजन (accommodation) (एक मौजूदा स्कीमा को बदलना क्योंकि नई जानकारी फिट नहीं होती)। उदाहरण के लिए, "त्रिभुज = तीन भुजाएं, ऊपर की ओर इशारा करती हुई" स्कीमा वाला एक बच्चा जो एक उल्टे या विषमबाहु त्रिभुज का सामना करता है, उसे समंजन करना होगा — स्कीमा को "कोई भी बंद तीन-भुजाओं वाली आकृति" में संशोधित करते हुए, केवल परिचित दिखने वाली नहीं।
- सामाजिक (वायगोत्स्कीवादी) रचनावाद — लेव वायगोत्स्की (1896–1934): इस पर केंद्रित है कि सीखना सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से कैसे होता है — एक शिक्षक, एक अधिक सक्षम साथी, या सहयोगी चर्चा के साथ — विशुद्ध रूप से एक बच्चे के मन के अंदर अकेले नहीं। इसका केंद्र है निकटतम विकास का क्षेत्र (Zone of Proximal Development, ZPD): वह अंतराल जो एक बच्चा अकेले क्या कर सकता है व एक "अधिक जानकार अन्य" (More Knowledgeable Other, MKO) से निर्देशित सहायता के साथ क्या कर सकता है, के बीच है। मचान (Scaffolding) वह अस्थायी समर्थन है जो एक शिक्षक इस क्षेत्र के भीतर प्रदान करता है, धीरे-धीरे वापस लिया जाता है जैसे-जैसे बच्चा स्वतंत्र रूप से सक्षम होता जाता है।
- शिक्षक के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता: ये दोनों धाराएं पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं — एक अच्छी तरह से चलाई गई रचनावादी गणित कक्षा व्यक्तिगत व्यावहारिक अन्वेषण (पियाजेवादी) व साथी चर्चा/निर्देशित शिक्षक समर्थन (वायगोत्स्कीवादी) दोनों को एक साथ उपयोग करती है, एक को दूसरे के बहिष्करण में नहीं।
एक रचनावादी गणित कक्षा वास्तव में कैसी दिखती है
- प्रसारण की तुलना में खोज। पहले एक सूत्र या नियम बताए जाने के बजाय, छात्र एक समस्या या गतिविधि की खोज करते हैं व पैटर्न या नियम को स्वयं खोजने की ओर निर्देशित किए जाते हैं — विशिष्टिकरण व व्यापकीकरण लेख में कवर किए गए विशिष्ट-मामलों-से-व्यापकीकरण दृष्टिकोण से सीधे जुड़ते हुए।
- व्यावहारिक मैनिपुलेटिव व ठोस अनुभव। भौतिक वस्तुएं, चित्र, व वास्तविक-दुनिया सामग्री, अमूर्त प्रतीक पेश किए जाने से पहले CPA दृष्टिकोण (अमूर्तिकरण लेख में कवर) के ठोस व सचित्र चरणों का समर्थन करती हैं।
- त्रुटियों को जानकारी के रूप में माना जाता है, विफलता के रूप में नहीं। एक गलत उत्तर बच्चे की वर्तमान स्कीमा/समझ को उजागर करता है, जो शिक्षक को केवल गलत चिह्नित करके आगे बढ़ने के बजाय एक निदान खिड़की देता है।
- शिक्षक एक सूत्रधार के रूप में, एकमात्र प्रसारक के रूप में नहीं। शिक्षक की केंद्रीय भूमिका "सही विधि की व्याख्या करने" से "एक ऐसा कार्य डिज़ाइन करने जो बच्चे को विधि बनाने देता है" की ओर बदल जाती है, फिर व्याख्यान देने के बजाय बच्चे के ZPD के भीतर मार्गदर्शन/प्रश्न पूछती है।
- साथी चर्चा व सहयोगी समस्या-समाधान। सहपाठियों के साथ एक गणित समस्या पर बात करना विभिन्न आंशिक समझों को सामने लाता है, जो — वायगोत्स्की के अनुसार — स्वयं सीखने का एक शक्तिशाली इंजन है, इससे ध्यान भटकाने वाली चीज़ नहीं।
- नए सीखने को पूर्व ज्ञान से जोड़ना। एक रचनावादी पाठ नई सामग्री पेश करने से पहले जानबूझकर वह सक्रिय करता है जो छात्र पहले से जानते हैं, क्योंकि नई समझ मौजूदा स्कीमाओं के ऊपर बनाई जाती है, उनसे अलग नहीं।
ये विचार आपस में कैसे जुड़ते हैं — एक हल किया गया रचनावादी पाठ: त्रिभुज के क्षेत्रफल की खोज
- पूर्व ज्ञान सक्रिय करें (रचनावादी प्रारंभिक बिंदु): छात्र पहले से एक पहले के पाठ से आयत का क्षेत्रफल (लंबाई × चौड़ाई) जानते हैं।
- ठोस अन्वेषण (पियाजेवादी + CPA): छात्रों को एक कागज़ का आयत दिया जाता है व एक विकर्ण खींचने के लिए कहा जाता है, फिर उसके साथ काटने के लिए, दो समान समकोण त्रिभुज बनाते हुए।
- ZPD के भीतर निर्देशित खोज (वायगोत्स्कीवादी): सूत्र बताए जाने के बजाय, छात्रों से पूछा जाता है (शिक्षक के मचान/प्रश्नों के साथ: "एक त्रिभुज का क्षेत्रफल पूरे आयत के क्षेत्रफल से कैसे तुलना करता है?") यह तर्क करने के लिए कि प्रत्येक त्रिभुज ठीक आयत के क्षेत्रफल का आधा है।
- व्यापकीकरण (विशिष्टिकरण व व्यापकीकरण लेख से जोड़ते हुए): चूंकि आयत क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई (यहां, आधार × ऊंचाई), व त्रिभुज ठीक इसका आधा है, छात्र व्यापकीकरण करते हैं: त्रिभुज क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊंचाई।
- साथी चर्चा व विशिष्टिकरण/परीक्षण: जोड़ियों में काम करते हुए, छात्र सूत्र को एक अलग, गैर-समकोण त्रिभुज पर परखते हैं (इसे एक अलग तरीके से एक आयत के अंदर फिट करके) यह जांचने के लिए कि नियम अभी भी सत्य है — शिक्षक के दावे के बजाय सामाजिक अंतःक्रिया व विशिष्टिकरण/परीक्षण के माध्यम से अवधारणा को मज़बूत करते हुए।
- आवश्यकता पड़ने पर समंजन: यदि एक छात्र की पूर्व स्कीमा थी "त्रिभुज सूत्रों में वह विशिष्ट आकृति शामिल होनी चाहिए जो मैंने पहले देखी है," तो यह गतिविधि समंजन के लिए मजबूर करती है — स्कीमा को "½ × आधार × ऊंचाई नियम किसी भी त्रिभुज पर लागू होता है" में अद्यतन करते हुए, एक वास्तव में निर्मित, न कि रटी हुई, समझ।
परीक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
रचनावाद भारतीय शिक्षक-पात्रता परीक्षाओं में सबसे अधिक भारी रूप से परखे जाने वाले शैक्षणिक दर्शनों में से एक है क्योंकि यह गणित शिक्षण के प्रति NCF 2005 के दृष्टिकोण के पीछे स्पष्ट, आधिकारिक दर्शन है — इस पाठ्यक्रम में लगभग हर "कौन-सा सर्वोत्तम शिक्षण अभ्यास है" परिदृश्य प्रश्न का इच्छित सही विकल्प के रूप में एक रचनावादी उत्तर है, जो इस सिद्धांत को केवल अपनी समर्पित इकाई ही नहीं बल्कि लागू शिक्षाशास्त्र प्रश्नों के एक बड़े हिस्से की व्याख्यात्मक कुंजी बनाता है।
स्मृति सहायक
याद रखें "बनाएं, भरें नहीं" (Build, Don't Fill) — रचनावाद मानता है कि एक बच्चे के मन को सक्रिय अनुभव के माध्यम से अपनी खुद की समझ बनानी चाहिए, बजाय इसके कि इसे केवल तथ्यों व प्रक्रियाओं से भरे जाने वाले एक खाली पात्र के रूप में माना जाए (पुराना, व्यवहारवादी/प्रसारण मॉडल)।
छत्तीसगढ़ पक्ष
रचनावाद स्वयं, एक मनोवैज्ञानिक सीखने के सिद्धांत के रूप में, सार्वभौमिक है व इसका कोई क्षेत्रीय मूल नहीं है — यह लेख जबरन एक नहीं जोड़ेगा। अमूर्तिकरण लेख में पहले ही बनाए गए स्थानीय-मैनिपुलेटिव बिंदु से अलग, छत्तीसगढ़ के स्कूली संदर्भ के लिए विशिष्ट एक वास्तविक, व्यावहारिक रूप से प्रासंगिक टिप्पणी: छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण सरकारी स्कूल बहु-कक्षा कक्षाओं (एक ही शिक्षक कई कक्षा स्तरों को एक साथ संभालता है) के रूप में संचालित होते हैं, जहां साथी-से-साथी व क्रॉस-ग्रेड सहयोगी सीखना अक्सर पहले से ही एक व्यावहारिक आवश्यकता है, जानबूझकर शैक्षणिक विकल्प नहीं — यानी वायगोत्स्कीवादी सामाजिक-रचनावादी घटक (एक "अधिक जानकार अन्य" के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से सीखना, जिसे शिक्षक होने की आवश्यकता नहीं) अक्सर पहले से ही इन कक्षाओं में परिस्थिति के कारण मौजूद होता है, व एक अच्छी तरह से प्रशिक्षित शिक्षक जानबूझकर इस मौजूदा संरचना पर निर्माण कर सकता है, इसे केवल एक संसाधन बाधा के रूप में मानने के बजाय जिससे निपटना है।
उदाहरण
- प्रक्रिया को वर्गीकृत करें: "पक्षी उड़ते हैं" स्कीमा वाला एक बच्चा एक पेंगुइन का सामना करता है व स्कीमा को "अधिकांश, लेकिन सभी नहीं, पक्षी उड़ते हैं" में संशोधित करना होगा। यह कौन-सी पियाजेवादी प्रक्रिया है? → समंजन (एक मौजूदा स्कीमा संशोधित की जाती है क्योंकि नई जानकारी फिट नहीं होती)।
- प्रक्रिया को वर्गीकृत करें: "त्रिभुज" के लिए एक स्कीमा वाला एक बच्चा एक नए, बड़े त्रिभुज को, जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा, बिना स्कीमा को संशोधित करने की आवश्यकता के सही ढंग से त्रिभुज के रूप में पहचानता है। यह कौन-सी पियाजेवादी प्रक्रिया है? → आत्मसात्करण (नई जानकारी बिना बदलाव की आवश्यकता के एक मौजूदा स्कीमा में फिट होती है)।
- ZPD पहचानें: एक बच्चा "34 + 28" अकेले हल नहीं कर सकता, लेकिन एक शिक्षक के मार्गदर्शक प्रश्न ("जब इकाई स्तंभ 9 से अधिक जुड़ता है तो आप क्या करते हैं?") के साथ इसे सही ढंग से हल कर सकता है। यह कौन-सी वायगोत्स्कीवादी अवधारणा दर्शाता है? → निकटतम विकास का क्षेत्र — स्वतंत्र व निर्देशित-सहायता प्रदर्शन के बीच का अंतराल।
- मचान पहचानें: जैसे-जैसे उदाहरण 3 में बच्चा अधिक आत्मविश्वासी होता है, शिक्षक धीरे-धीरे कम मार्गदर्शक प्रश्न पूछता है जब तक बच्चा समान समस्याओं को अकेले हल नहीं कर लेता। समर्थन की इस क्रमिक वापसी को क्या कहा जाता है? → मचान (अस्थायी समर्थन, क्षमता बढ़ने के साथ धीरे-धीरे हटाया गया)।
- रचनावाद को व्यवहारवाद से अलग करें: एक शिक्षक छात्रों से बार-बार गुणा तालिकाओं को ज़ोर से बिना यह चर्चा किए कि गुणा क्यों काम करता है, अभ्यास कराता है, सही जाप को पुरस्कृत करते हुए। यह कौन-सा सीखने का सिद्धांत दर्शाता है? → व्यवहारवाद (दोहराव व पुनर्बलन, आंतरिक समझ पर बहुत कम ध्यान के साथ) — रचनावाद नहीं।
- एक कक्षा परिदृश्य का मूल्यांकन करें (CTET-शैली): कौन-सी कक्षा एक रचनावादी गणित दृष्टिकोण को सबसे अच्छी तरह दर्शाती है: (क) छात्र बोर्ड से एक हल किया गया उदाहरण कॉपी करते हैं, या (ख) छात्र समूहों में एक समस्या की खोज करते हैं व अपनी स्वयं की समाधान विधि की ओर निर्देशित किए जाते हैं? → (ख) — सक्रिय अन्वेषण व निर्देशित स्व-खोज एक रचनावादी कक्षा की पहचान है, निष्क्रिय नकल नहीं।
- त्रुटि प्रबंधन पर लागू करें: एक छात्र का "7 × 8" का उत्तर 54 है। एक रचनावादी शिक्षक का सबसे अच्छा अगला कदम है: → यह जांचना कि किस विधि या गलतफहमी ने 54 उत्पन्न किया (वर्तमान स्कीमा का निदान करना) बजाय इसके कि इसे केवल गलत चिह्नित करके सही उत्तर दे दिया जाए।
- बहु-कक्षा कक्षा परिदृश्य (CG-प्रासंगिक): एक छोटे ग्रामीण छत्तीसगढ़ स्कूल में, एक कक्षा 4 का छात्र पास बैठे एक कक्षा 3 के छात्र को एक भिन्न अवधारणा समझाता है, जो फिर इसे केवल शिक्षक की व्याख्या से बेहतर समझता है। यह कौन-सी वायगोत्स्कीवादी अवधारणा दर्शाता है? → एक "अधिक जानकार अन्य" (MKO) के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से सीखना — MKO को शिक्षक होने की आवश्यकता नहीं; एक अधिक सक्षम साथी यह भूमिका निभा सकता है।
- एक रचनावादी गतिविधि डिज़ाइन करें: केवल नियम बताने के बजाय रचनावादी सिद्धांतों का उपयोग करते हुए "तुल्य भिन्न" की अवधारणा पेश करने के लिए एक गतिविधि सुझाएं। → छात्रों को समान कागज़ की पट्टियां दें; उन्हें एक को आधे में मोड़ने व एक आधा छायांकित करने दें, दूसरे को चौथाई में मोड़ने व दो चौथाई छायांकित करने दें, व छायांकित क्षेत्रों की तुलना करने दें — सामान्य नियम बताए जाने से पहले उन्हें प्रत्यक्ष तुलना के माध्यम से ½ = 2/4 खोजने देते हुए।
- दोनों धाराओं को संतुलित करें: एक शिक्षक हर गणित पाठ के लिए केवल व्यक्तिगत, मौन वर्कशीट अभ्यास का उपयोग करता है, यह मानते हुए कि यह पर्याप्त रूप से रचनावादी है क्योंकि छात्र "इसे स्वयं समझ लेते हैं।" इसका मूल्यांकन करें। → अधूरा — यह केवल पियाजेवादी/व्यक्तिगत-अन्वेषण धारा को दर्शाता है जबकि वायगोत्स्कीवादी/सामाजिक धारा (साथी चर्चा, ZPD के भीतर शिक्षक मचान) की उपेक्षा करता है; एक पूर्ण रचनावादी दृष्टिकोण दोनों का उपयोग करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य / तालिका
| व्यवहारवाद (पुराना दृष्टिकोण) | रचनावाद (NCF 2005 का दृष्टिकोण) | |
|---|---|---|
| सीखने वाले का दृष्टिकोण | जानकारी का निष्क्रिय प्राप्तकर्ता | समझ का सक्रिय निर्माता |
| मुख्य तंत्र | अभ्यास, दोहराव, पुनर्बलन | अन्वेषण, पूर्व ज्ञान से जोड़ना, सामाजिक अंतःक्रिया |
| शिक्षक की भूमिका | सही उत्तरों/प्रक्रियाओं का प्रसारक | सूत्रधार, कार्यों का डिज़ाइनर, ZPD के भीतर मार्गदर्शक |
| त्रुटियों को माना जाता है | सुधारने/दंडित करने योग्य कुछ | वर्तमान समझ के बारे में निदान जानकारी |
| पियाजे (संज्ञानात्मक रचनावाद) | वायगोत्स्की (सामाजिक रचनावाद) |
|---|---|
| फोकस: व्यक्तिगत मन ज्ञान बनाता है | फोकस: सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से ज्ञान बनाया जाता है |
| मुख्य शब्द: स्कीमा, आत्मसात्करण, समंजन | मुख्य शब्द: निकटतम विकास का क्षेत्र (ZPD), मचान, अधिक जानकार अन्य (MKO) |
| सीखना आंतरिक संज्ञानात्मक संघर्ष/समायोजन से संचालित | सीखना दूसरों के साथ निर्देशित अंतःक्रिया से संचालित |
सामान्य भ्रांतियां
- "रचनावाद" को कक्षा अभ्यास से असंबंधित विशुद्ध सिद्धांत-शब्द स्मरण मानना। जैसा ऊपर हल किए गए पाठ में दिखाया गया, यह पिछले लेखों में पहले से कवर की गई विशिष्ट, ठोस शिक्षण तकनीकों (CPA, उदाहरणों-से-व्यापकीकरण) को सीधे समझाता व न्यायसंगत ठहराता है।
- आत्मसात्करण व समंजन को गड्डमड्ड करना। आत्मसात्करण = नई जानकारी एक मौजूदा स्कीमा में बिना उसे बदले फिट होती है; समंजन = स्कीमा को स्वयं बदलना होगा क्योंकि नई जानकारी फिट नहीं होती।
- पियाजे व वायगोत्स्की को प्रतिद्वंद्वी, परस्पर अनन्य सिद्धांतों के रूप में मानना। एक मज़बूत रचनावादी कक्षा व्यक्तिगत अन्वेषण (पियाजेवादी) व निर्देशित सामाजिक अंतःक्रिया (वायगोत्स्कीवादी) दोनों को एक साथ उपयोग करती है।
- यह मानना कि रचनावाद का अर्थ है कि एक शिक्षक को कभी कुछ भी सीधे नहीं समझाना चाहिए। रचनावाद शिक्षक की भूमिका को समाप्त नहीं करता — यह इसे निर्देशित सूत्रधार (ZPD के भीतर मचान) की ओर बदलता है, पूर्ण मौन या अनुपस्थिति की ओर नहीं।
- यह मान लेना कि कोई भी समूह गतिविधि स्वतः रचनावादी मानी जाती है। एक समूह गतिविधि जो वास्तव में केवल सबसे तेज़ छात्र से उत्तर कॉपी करना है, रचनावादी नहीं है; तर्क की वास्तविक खोज व चर्चा मुख्य घटक है, केवल एक समूह में काम करना नहीं।
- यह मानना कि त्रुटियों को हमेशा तुरंत बिना जांच के सुधारा जाना चाहिए। एक रचनावादी दृष्टिकोण एक त्रुटि को बच्चे की वर्तमान स्कीमा के बारे में निदान जानकारी के रूप में मानता है, सुधारने से पहले जांचने योग्य।
- यह मान लेना कि रचनावाद एक विशुद्ध रूप से पश्चिमी आयात है जिसका भारतीय कक्षाओं से कोई प्रासंगिकता नहीं। NCF 2005, भारत की अपनी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या नीति, गणित शिक्षण के लिए अपने मार्गदर्शक दर्शन के रूप में रचनावाद को स्पष्ट रूप से अपनाती है।
- यह अनदेखा करना कि बहु-कक्षा ग्रामीण कक्षाओं में पहले से ही स्वाभाविक रचनावादी घटक हो सकते हैं। जैसा ऊपर छत्तीसगढ़ पक्ष में कवर किया गया, ऐसी सेटिंग्स में साथी-से-साथी शिक्षण एक वास्तविक, मौजूदा संसाधन है, केवल एक बाधा नहीं।
पूर्व वर्ष के प्रश्न पैटर्न
वर्तमान पाठ्यक्रम चक्र के लिए इस सटीक उप-विषय के लिए कोई सत्यापन-योग्य, उद्धृत करने योग्य CG सहायक शिक्षक/CGPSC/CG व्यापम पिछले वर्ष का प्रश्न पुष्टि नहीं किया जा सका, इसलिए — बताए गए फॉलबैक नियम के अनुसार — यह खंड अच्छी तरह से दस्तावेज़ीकृत CTET/REET राष्ट्रीय पैटर्न पर निर्भर करता है, जहां रचनावाद गणित-शिक्षाशास्त्र खंड में सबसे अधिक बार परखे जाने वाले शैक्षणिक दर्शनों में से एक है:
- परिदृश्य-पहचान पैटर्न: कई कक्षा परिदृश्यों का वर्णन किया जाता है, व उम्मीदवारों को यह पहचानना होता है कि कौन-सा एक रचनावादी दृष्टिकोण को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है — सामान्यतः, सही उत्तर छात्रों को अपनी स्वयं की समाधान विधि खोजने के लिए सक्रिय रूप से एक समस्या की खोज करते हुए वर्णित करता है (जैसे, "छात्र एक समस्या का समाधान खोजने के दौरान अन्वेषण में लगे हुए हैं"), न कि एक हल की गई विधि को निष्क्रिय रूप से प्राप्त करते हुए।
- शब्दावली-अनुप्रयोग पैटर्न: एक संक्षिप्त परिदृश्य दिया जाता है (जैसे, एक प्रति-उदाहरण का सामना करने के बाद एक मौजूदा समझ को संशोधित करता हुआ बच्चा) व उम्मीदवारों को इसे सही ढंग से आत्मसात्करण या समंजन के रूप में लेबल करना होता है, या ZPD/मचान के एक उदाहरण की पहचान करनी होती है।
- तुलना पैटर्न: एक प्रश्न एक रटा-अभ्यास कक्षा परिदृश्य की तुलना एक अन्वेषण-आधारित परिदृश्य से करता है, यह पूछते हुए कि NCF 2005 किसे पसंद करता है — रचनावाद-बनाम-व्यवहारवाद भेद को सीधे परखते हुए।
स्रोत के बारे में ईमानदार टिप्पणी: लेखन के समय इस सटीक उप-विषय के लिए किसी CG-विशिष्ट पिछले वर्ष के उद्धरण की पुष्टि नहीं हो सकी; भरोसा करने से पहले किसी तृतीय-पक्ष कोचिंग सामग्री के किसी विशिष्ट CG व्यापम वर्ष/प्रश्न के दावे को आधिकारिक CG व्यापम उत्तर कुंजी के विरुद्ध जांचें।
स्वयं जांचें
- क्या आप एक वाक्य में बता सकते हैं कि रचनावाद सीखने के बारे में क्या मानता है?
- क्या आप आत्मसात्करण को समंजन से अलग कर सकते हैं, प्रत्येक के एक उदाहरण के साथ?
- क्या आप निकटतम विकास का क्षेत्र व मचान समझा सकते हैं, व एक शिक्षक गणित पाठ में दोनों को कैसे लागू करेगा?
- पियाजे व वायगोत्स्की की रचनावाद की धाराओं को प्रतिस्पर्धी के बजाय पूरक क्यों माना जाता है?
- क्या आप अपनी पसंद की एक गणितीय अवधारणा के लिए एक छोटी रचनावादी गतिविधि डिज़ाइन कर सकते हैं, यह पहचानते हुए कि कौन-सा चरण खोज को दर्शाता है, कौन-सा सामाजिक अंतःक्रिया को, व कौन-सा व्यापकीकरण को?
- एक रचनावादी कक्षा में एक गलत उत्तर को "निदान जानकारी" के रूप में क्यों माना जाता है, केवल सुधारने योग्य एक गलती के रूप में नहीं?